Sunday, 31 December 2023

Ram ka vakeel

 
राम का भव्य मंदिर बन जाएगा।
देश-विदेश से पर्यटक आएगा।
अयोध्यावासी की आय बढ़ेगी,
क्षेत्र का आर्थिक सुधर हो पायेगा।
 
अयोध्या में राम भक्त पटे होंगे।
भक्तों की सेवा में लोग जुटे होंगे।
कई व्यवसाय सेवाओं से लोग,
कमाई के साथ खुशियों से अटे होंगे।
 
वृहत राष्ट्र का यह पर्यटन होगा।
उमड़ता यहाँ पर जन जन होगा।
इस सृष्टि को जो है चलाने वाला,
प्रभु राम को करता नमन होगा।
 
यहाँ मंदिर बना आलीशान होगा।
लोगों के सौहार्द का निशान होगा।
प्रसाद बेच रहा, इस स्थल पर,
बैठा हिन्दू और मुसलमान होगा।
 
चलाता है सम्पूर्ण सृष्टि का विधान।
संविधान से उसको डराता है इन्सान।
रखता शक्ति, वो चाहेगा लिख देगा,
मिटाकर, राष्ट्र का नया संविधान।
 
राम-नाम में लगा अरबों का मन है। 
राम नाम ही साधु संतों का जीवन है 
कितनों के कठिन समय का सहारा,
कितनों का निःशुल्क मनोरंजन है। 
 
अवध से है रामसेतु तक, राम का नाम।
जोड़ रखा है राष्ट्र को सब, राम का नाम।
राम नाम में है सफल, एक अपार बल,
रोकता दुष्परिणाम सकल, राम का नाम।
 
श्रीलंका पर्यटन चला रहा, राम के नाम पर।
करोड़ों प्रति वर्ष कमा रहा, राम के नाम पर।
भारत में जन्मा जन्म स्थान का विवाद कर
राष्ट्र को क्षति पहुंचा रहाराम के नाम पर। 
 
मन में विश्वास जगाता, राम का नाम।
कर्म हेतु उत्साह जगाता, राम का नाम।
राम नाम हर लेता बहुतों के दुःख को,
बुरी शक्ति को है भगाताराम का नाम।
 
दशानन के शीश दस, मिथ्या, घृणा, लोभ,
मद, मत्सर, ईर्ष्याकाम, मोह, द्वेष  क्रोध।
कुचल के रख देता सभी को राम का नाम,
और मिटा देता है जीवन के सब क्षोभ।
 
जीवित रहे राम का नाम, रावण क्यों चाहेगा !
धरती से हो पाप तमाम, रावण क्यों चाहेगा !
उसे तो भोग चाहिएवैभवविलास चाहिए,   
कोई धाम हो राम के नाम, रावण क्यों चाहेगा !
  
खुद के कार्य हों निर्वाध, रावण यही चाहता।
वाधित हो राम के काम, रावण यही चाहता।
दुनिया हो गयी राम-मय तो उसकी चलेगी,
फैले उसी का ताम झाम, रावण यही चाहता।
 
मंदिर से और भी सुदृढ़ होगा राम का नाम।
अब कभी नहीं संकीर्ण होगा राम का नाम।
विश्व भर में छाया हुआ है राम का प्रताप,
और बढ़ेगा, जब जीर्ण होगा राम का नाम। 

लोकतंत्र में किसी के वोट बैंक के डर से। 


बहुसंख्यक अपने अधिकार को तरसे। 
रहना पड़ा, राम लला को भटकते दूर,
कहीं पर बाहर, अपने अवध नगर से। 
 
राम में करोड़ों लोग लगे बझे होते हैं।
मन के विकारों को सब तजे होते हैं।
कोई पूजा, दर्शन और कीर्तन करता,
बहुत से लोग राम नाम भजे होते हैं।
 
राम नाम में अगर वो नहीं समायेंगी।
वो सभी शक्तियां आसुरी हो जाएँगी।
विध्वंसक कार्यों में विनिवेशित होकर,
कहीं कहीं राष्ट्र को क्षति पहुंचाएंगी।
 
सद्चरित्र को पुष्ट करता, राम का नाम।
मन में उपजे कष्ट हरता, राम का नाम। 
आसुरी शक्तियां जो भी उत्पन्न होतीं,
उन सबको नष्ट करता, राम का नाम। 
 
मन का मैल धुल जाता, भजने से 'राम'
जीवन अमृत मिल जाता, भजने से 'राम'
दुर्गुणों से लड़ने का अद्भुत बल मिलता,
रावण का दम हिल जाता, भजने से 'राम'
 
राम, मात्र नाम नहीं, रामायण-सूत्र है।
है तो ईश्वर, कहने को दशरथ पुत्र है।
राम नाम में मानवता के आदर्श सभी,
कृपा, करुणा, और सुखों का समुद्र है।
 
राम पूजन में निवेश है, कितनी शक्ति।
राम भजन में निवेश है, कितनी शक्ति।
जाने से बच जाती है विध्वंस की ओर,
राम नमन में निवेश है, कितनी शक्ति।
  
दुःख, दरिद्रता के शाप हटाता, राम का नाम।
ऊपर आये सब पाप भगाता, राम का नाम।
बस जाता है राम का नाम जिसके हृद में,
अनेकानेक संताप मिटाता, राम का नाम।
 
राम-नाम में दया, धर्म और करुणा रमा 
राम का नाम ही है दान, कृपा और क्षमा
विश्व में शांति स्थापित करने का 'राम'
संतों ने दिया है एक अद्भुत मन्त्र थमा
 
राम नाम अनेक लोगों को भक्ति देता।
भक्तों को अनेक पापों से विरक्ति देता।
आदर्श के पथ पर चलने को प्रेरित कर,
राष्ट्र को प्रेम की अलौकिक शक्ति देता।
 
राम-नाम जीवन का एक महामंत्र है।
कलियुग में निष्पाप का अद्भुत यंत्र है।
जगत को शांति मार्ग पर चलाने वाला,
मिला एक अलौकिक और सरल तंत्र है।
 
 
 
 
जब जहाँ मेरा वादी चाहेगा, मे लार्ड!
राम-मंदिर तो बन जायेगा, मे लार्ड!
 
भक्तों पर अनेक कृपा बरसाई।
राक्षसों से पृथ्वी रिक्त कराई।
अपने मंदिर को तरस रहा है,
जिसने है सारी सृष्टि बनायी।
एक दिन महिमा दिखलायेगा,
मंदिर भी वही बनाएगा, मे लार्ड! राम मंदिर  ...
 
भक्त बनाने जब आगे आते। 
प्रतिवादी अनेक धौंस जमाते।
झगड़ा तो कभी रगड़ा करने को,
नेता उन्हें बहु भांति उकसाते।
भक्त, कब तक प्राण सुखायेगा!
एक दिन राम को बुलाएगा, मे लार्ड! राम मंदिर ..
 
मूर्त रूप में नहीं दिखता वो।
हर जीव में मगर बसता वो।
प्राण जिसे कहते, वही तो है,
वायु बन सांसों में चलता वो।
विरोधियों के बुद्धि में घुस कर,
अपनी शक्ति दिखायेगा, मे लार्ड! राम मंदिर  ...
 
मेरे तर्क, यदि मान्य होंगे।
प्रभु के गुण सम्मान्य होंगे।
पापियों का बल बढ़ता जायेगा,
देश में भरे धन धान्य होंगे।
उसको यदि न्याय नहीं मिला,
तो  न्याय भी पछतायेगा, मे लार्ड! राम मंदिर  ...
 
अवमानना से वह नहीं डरेगा।
तुम्हें भी कटघरे में खड़ा करेगा।
कुछ भी नहीं असंभव उसको,
मंदिर तो उसका अवश्य बनेगा।
पापी हैं जो भी इस धरती भर,
करनी का भोग चखायेगा, मे लार्ड! राम मंदिर  ...
 
धर्मों से ऊपरभगवान है वो। 
सबका ही कृपानिधान है वो।
नाम लेकर गया दुनिया से,
धरती पर रहा महान है वो।
कितना भी अमृत करे धारण,
 रावण, फिर भी मर जायेगा, मे लार्ड! राम मंदिर  ...
 
मनुष्यों में रह, वह देखता सब।
आवश्यकता  पर, होगा प्रकट।
मंदिर है उसके होने का प्रतीक,
राष्ट्र का होता है, जैसे ध्वज।
एक नाम रोकता, कितने विध्वंस,
पुण्यात्मा ही समझ पायेगा, मे लार्ड! राम मंदिर  ...
 
ऐसे ही बेघर रहे यदि राम लला।
मंदिर बना रहे विवाद का मसला।
करोड़ों की भावना से हो खिलवाड़,
राष्ट्र का कैसे हो पायेगा भला।
राम के बिना, दानव सिर उठाएंगे,
मानव व्याकुल हो जायेगा, मे लार्ड! राम मंदिर  ...
 
बड़ा ही धैर्य दिखाया है राम ने।
इतना सहा, नहीं आया सामने।  
बन जाने दो अब मंदिर श्रीमान,
तो आएगा वो तुम्हें थामने।  
भक्त होंगे, मोड़ लेगा मुंह वह
दैत्यों से फिर कौन बचायेगा, मे लार्ड! राम मंदिर  ...
 


Thursday, 30 March 2023

Banshi Baram Baba


 'Hail Banshi Brahm Baba’

the prime deity of the vicinity.

His temple is in an Indian village,

‘Hansrajpur’ in the state of U.P. 


He is shaped like 'Shivalinga', 

a carved cone instead of statue. 

Thousands of people pray to Him, 

to come their wishes true. 


In the great temple of Baba,

people perform worships and hawans. 

With blessings of their deity,

they get fulfilled their solicitations. 


Ladies come to worship in groups,

singing bhajans and devotional songs.

Banshi Brahm Baba saves them,

from happening anything wrong.


Since childhood I've great faith

in my Lord ‘Banshi Brahm Baba’.

Before beginning new task, I say -

‘Jai ho Banshi Brahm Baba’


In my childhood, other Gods were,

far above to understand.

Only ‘Banshi Brahm Baba’ was 

near me and used to withstand.


Whenever, I had to appear,

in any of my examinations.

I prayed him to get me success,

in the excellent gradations.


Once a subject was hard to me

for that I had no preparation.

I was too much worried and

next day was, the examination.


Prayed ‘O Baram Baba!’ help me.

Luckily, the questions, those came.

The night I dreamt a question paper, 

most of them were the same.


Many, who have faith, they pray

and at place of Baba, bit of ghee burn. 

Are blessed by Baba Banshi Dhar Brahm, 

and their wishes are fulfilled in return.


S. D. Tiwari

Saturday, 16 July 2022

Kahan kahan royen, ghazal


किये हमसे जो तुम बर्ताव, कहाँ कहाँ रोयें। 

दिए गहरे तुम्हारे घाव, कहाँ कहाँ रोयें। 


गया होता छलनी सीना, चलाये तीरों से  

सहे उस पर भी बड़े ताव,  कहाँ कहाँ रोयें।


दे दी मुश्किलें भारी, कि निकलना मुश्किल 

खेले ऐसे ही तुम दाव, कहाँ कहाँ रोयें।

 

चहक उठता था चमन दिल का,  तुमसे मिल के कभी 

बंद कर दिया देना भाव,  कहाँ कहाँ रोयें।  


पार हो जायेगी बैठे थे हम उम्मीदों में   

डुबोये प्यार की तुम नाव, कहाँ कहाँ रोयें। 


मना कर दिया पेड़ों ने, अब तो देने से

जुड़ाने को थोड़ी छाँव, कहाँ कहाँ रोयें।


चुभन देती है बड़ी दर्द, 'देव' उन तीरों की 

छीना जीने का भी चाव, कहाँ कहाँ रोयें।


(C)  एस. डी. तिवारी 


(C)  एस. डी. तिवारी 



Wednesday, 23 December 2020

Sarvesh Chandausavi सर्वेश चंदौसवी


कोई न पढ़ा होगा, जितना पढ़ गए, सर्वेश चंदौसवी।   

सोनार जैसे गजलें कमाल गढ़ गए, सर्वेश चंदौसवी। 

'लफ्जों के समुन्दर' को खंगाल कर जब उड़ेला उन्होंने,  

एक सौ उन्नीस किताबों में मढ़ गए, सर्वेश चंदौसवी। 

'सम्मानों की, एक लम्बी सी कतार है, 'तेरे ही दम से'

लिम्का बुक में भी नाम अपना जड़ गए, सर्वेश चंदौसवी। 

'वक्त का खाका' खींचा, 'चाँद को टांक दिया' जमीं से, 

क्या पड़ी? सातवें आसमां पे चढ़ गए, सर्वेश चंदौसवी। 

महफ़िलों में बड़ी कदर थी, दिलों में उनके लिए जगह थी, 

'मुहब्बत का ख्वाब' दिखा क्यों बिछड़ गए? सर्वेश चंदौसवी। 

चलायी जब कलम तो 'उजालों की तस्वीर' को उकेरा,

'धूप का चेहरा' सामने हमारे कर गए, सर्वेश चंदौसवी।

'ख़ुशी की लौ' 'देव', जलाये रखे हम 'महकते अँधेरे में' 

हमारे बीच से, कैसे फिर कढ़ गए! सर्वेश चंदौसवी।

- एस. डी. तिवारी 




प्रोफेसर डॉ. सीताराम के पवार 

बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी और हिंदी साहित्य तथा शिक्षा को समर्पित प्रोफेसर सीताराम के पवार ने हिंदी के विकास व उन्नयन के लिए जो अद्वितीय कार्य किया है, उसे वर्षों तक याद रखा जायेगा। प्रोफेसर सीताराम पवार बालपन से ही एक मेधावी छात्र थे। उनका पालन पोषण एक साधारण परिवार में होने के पश्चात् भी वे अपने परिश्रम और माँ के आशीर्वाद के फलस्वरूप सफलता के सोपान चढ़ाते गए। जहाँ उन्होंने अपने शोध कार्यों से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया वहीं सैकड़ों छात्रों को शोध में मार्गदर्शन करके पी. एच. डी. की उपाधि दिलवाये ।  

विद्यार्थी काल से ही पढ़ने के साथ पढ़ाने की लगन थी। 
पढ़ने वाले छात्रों की विशेष मदद करने की प्रवृत्ति मन थी। 
साधनों का आभाव महान शिक्षाविद बनने से रोक न सका,  
शिक्षा और शोध ही डॉक्टर पवार के दिल की धड़कन थी। 

डॉक्टर पवार का जीवन संघर्ष व अभावों के बावजूद निरंतर सीखने और सिखाने की प्रक्रिया रहा है। जमीनी स्तर पर शिक्षा का प्रसार करना उनके व्यक्तित्व का हिस्सा रहा है। शिक्षा के प्रसार के लिए गांव गांव तक जाना और हिंदी शिक्षा के लिए जन  जन को जागरूक करना उनके जीवन का लक्ष्य रहा है। वे राष्ट्रीय बंजारा प्रोफेसर संघ और भाषा संगम जैसे संगठनों के माध्यम से सामाजिक और भाषाई जागरूकता के लिए भी समर्पित रहे हैं।

साहित्य और शोध में महत्वपूर्ण योगदान दिए, प्रोफेसर पवार। 
मार्गदर्शन से अनगिनत क्षात्रों का कल्याण किये, प्रोफेसर पवार। 
संघर्ष पूर्ण जीवन जीकर भी अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहे,
 अपने विवेक और साहस से चुनौतियाँ पार किये, प्रोफेसर पवार। 

प्रोफेसर पवार का जन्म कर्णाटक के विजय नगर में हुआ, और वे वहीं अपने भविष्य को तलाशने व तराशने लगे।  उनके शिक्षा और शोध के प्रति अटूट निष्ठा का प्रमाण है कि उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ में हिंदी विभाग के अध्यक्ष और प्रोफेसर के रूप में लंबी सेवा दी है।

विश्वविद्यालय के विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों प्रबंधन उनके हाथ में रहा, जिनमें छात्र कल्याण विभाग (Director, Students Welfare) , मुद्रण विभाग (printing press ) और दूरवर्ती शिक्षा विभाग (Department of Distance Learning)  प्रमुख हैं।

 वे लोक सेवा आयोग के मूल्यांकनकर्ता और विभिन्न विश्वविद्यालयों के 'बोर्ड ऑफ अपॉइंटमेंट' (BOA) व 'पाठ्यक्रम विकास समितियों' के सक्रिय सदस्य रहे हैं।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी, बहुभाषी साहित्यकार हुए, प्रोफेसर पवार। 
कई राष्ट्रीय संगठनों के नामित सलाहकार हुए, प्रोफेसर पवार। 
कर्णाटक प्रदेश में जन्मे, भाषा व साहित्यिक यात्रा करते,
हिंदी तथा कन्नड़ विकास व उन्नयन के आधार हुए, प्रोफेसर पवार।  

एक बहुभाषी साहित्यकार के रूप में उनका कार्य केवल हिंदी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने हिंदी, कन्नड़, मराठी और उर्दू साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन भी किया है। उनके निर्देशन में अनेक शोधार्थियों ने पीएच.डी. (Ph.D.) और एम.फिल. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं।

अध्यापन और शोध कार्यों में दक्ष रहे, प्रोफेसर पवार। 
विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों के अध्यक्ष रहे, प्रोफेसर पवार।  
पाठ्यक्रम विकास, लोक सेवा आयोग में मूल्यांकनकर्ता,
शिक्षा के प्रसार में निष्ठापूर्वक व्यस्त रहे, प्रोफेसर पवार। 

 उनके संपादन और लेखन में 'समकालीन भारतीय साहित्य: विमर्श', 'समकालीन हिंदी साहित्य: किसान एवं श्रमिक जीवन संघर्ष' सम्मिलित हैं। उनकी रचनाओं में त्रिवेणी के साहित्य का विवेचनात्मक अध्ययन, कबीरदास के दार्शनिक विचार, हिंदी और कन्नड़ साहित्य के सन्दर्भ में साहित्य मंथन, स्वत्रंतोत्तर हिंदी और कन्नड़ उपन्यासों में दलित संवेदना जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें शामिल हैं। 

 वे भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों (जैसे खान मंत्रालय) की हिंदी सलाहकार समितियों के नामित सदस्य के रूप में तथा गृह मंत्रालय के अंतर्गत हिंदी राजभाषा के सलाहकार मंडल के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएँ देते रहे हैं। तथा भारत सरकार के उच्च शिक्षस विभाग के सदस्य के रूप में सक्रिय रहे हैं। 

पाठ्यक्रम विकास समितियों के सदस्य रहे, प्रोफेसर पवार। 
अनेक छात्रों के उच्च शिक्षा के प्रेरणा स्रोत रहे, प्रोफेसर पवार। 
अपनी अनुपम और विशिष्ट साहित्यिक कृतियों के कारण  
कई पुरस्कारों और सम्मानों से ओत प्रोत रहे, प्रोफेसर पवार।  

प्रोफेसर पवार का जीवन उन सभी के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी को अपनी प्रगति के आड़े नहीं आने देते। माँ के आशीर्वाद और अपनी मेहनत से उन्होंने न केवल अपना मार्ग बनाया, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य को भी रोशन किया।

डॉ. एस. डी. तिवारी