Tuesday, 28 April 2026

Naari

तेरी आँखों में नारी 

 तेरी आँखों में किसी ने झील, किसी ने समुन्दर देखा; 
मैंने तो बस बहते हुए पानी देखा, हे नारी!
 कभी आत्मज का मोह लिए, कभी प्रियतम विछोह लिए ;
 सिसकियों में ही तेरी जिंदगानी देखा , हे नारी! 

दुःख के घूंट स्वयं पी जाती, खुशियों की बाँट लगाती; 
अपनों के लिए सर्वस्व लुटाते देखा, हे नारी! 
फूलों से भी सुन्दर तू है, प्रभु की विशिष्ट अनुपम रचना; 
घर की बगिया में सुगंध बिखराते देखा, हे नारी!  

कभी तो ममता का, कभी  बोझ कुटुंब का भारी तुझपे; 
थके बिन सेवा करते, ज्यूँ चारी देखा, हे नारी ! 
लिए हुए शक्ति सृजन की, तू ही देती जन्म पुरुष को; 
तेरी भावनाओं पर करते सवारी देखा, हे नारी! 

डाली से टूट मंदिर जाएगी या जाएगी रंगशाला किसी; 
भाग्य के लेखा से तुझे अनभिज्ञ देखा, हे नारी!  
आता जब भी संकट भारी, हो जाती खड्ग सी कठोर तू ; 
पर प्रेम वश पराजय का सानिध्य देखा, हे नारी!  


 चलना होता तुझे, दुःख के काँटों से आंचल को बचा, 
 जग की राहें काटों से भरे देखा , हे नारी!   
पति चाहे पतित, व्यसनी हो, सहती उसको भी चुपके; 
पति के लिए सुखों से परे देखा, हे नारी!  

अभागे जो देख पाते बस, यौवन की जो सुंदरता तेरी; 
उम्र ढले माँ सी सुन्दर होते देखा, हे नारी!     
कितने निष्ठुर होते, दुखाते जो, तेरे कोमल मन को; 
तुझको सदैव कुटुंब संजोते देखा, हे नारी!   

Friday, 17 October 2025

Chhath geet


छठ गीत 

जनि बईठा हो सुग्गा घवद पर, केला जाई जूठियाय। 

दउरी में भर के ले जइबों, चढ़ावे के हो छठ घाट। 

चढ़इबों उ केला छठी माई के, तोके देबों परसाद।

फल फूल खीर अउर ठेकुआ, छठी माई के भाय।   

छठ माई सहाय सुरुज क, जग के करे उजियार।

देवी होलीं खुश पाय अरघिया, सूरज डूबे उतराय।   

धरती पर बहुते विशेष होखे, रविशष्ठी त्यौहार। 

कईला से पूजा छठी माई क, संतति सम्पति भर जाय।    

मैया देलिन वोकरा आशिषिया, महिमा करे जे प्रसार।         

रखे संयम नियम से छठ पूजा, सुखी घर परिवार।

 

डॉ. एस. डी. तिवारी 



गलती क पुतला बानीं। हजारों गलती करत बानीं।।

देवी मईया क्षमा करिहा। हमरा के क्षमा करिहा।।

अज्ञान समझ के क्षमा करिहा।

अबोध समझ के क्षमा करिहा।

 

पूजा क ढंग न जानीं। तन्त्र अउरी मन्त्र न जानीं।।

बालक समझ के क्षमा करिहा। याचक समझ के क्षमा करिहा।

 

तोहरा के जे भी पुकारे। ओकरा के तॅू पार उतारे।।

अपराधी समझ के क्षमा करिहा। पापी समझ के क्षमा करिहा। 

 

भूल से जे जवन कईल। शरण में तोहरी गईल।।

मूर्ख समझ के क्षमा करिहा। पुत्र समझ के क्षमा करिहा।।


करे वाली सबकर रक्षा। प्रेम से लीहा हमरो पूजा।।

बुद्धिहीन समझ के क्षमा करिहा। दीन समझ के क्षमा करिहा।।

 

रउआ त जग क जननी। रउए जग के जगमगवलीं।।

मां हमरी पर दया करिहा। सब अपराध क्षमा करिहा।

मईया हमरा के क्षमा करिहा।

अज्ञान समझ के क्षमा करिहा।।


Saturday, 9 August 2025

Laal chunar pa ke / royi heer

 

 

 रब मेरे ...!
रब मेरे ... ! मेनू .., लाल चुनर पा के आणा।


मेनू ना भावे रब  ...

मेनू ना भावे रब ..., चीटिया चुंदरी,
नाइयों दूधिया लिवास;
माथे ते टीका वे, मांगां विच सिन्दूर पाणा।

 रब मेरे ... मेनू ..., लाल चुनर पा के आणा।

 

चोटी मैं गूंथूं वे ..., 
चोटी मैं गूंथूं वे, गजरा सजावां नी,
केशां नु  .. लेवांगी संवार;
लागे ना नजर कोई ..., अक्खां विच काजल पाणा।

 रब मेरे ... मेनू ..., लाल चुनर पा के आणा।

 

नाक ते नथनी वे ...

नाक ते नथनी वे, कानां वीच झुमका, 
गर्दन ते डालांगी हार;
हाथां ते हीना वे, कलाई विच चूड़ी पाणा।

 रब मेरे ... मेनू ..., लाल चुनर पा के आणा।

 

बाहां सजावां नी ..., 

बाहां सजावां नी ..., पहुंचा भुजदंड पहणा,
उंगल विच मुदरी डाल;
पांव सजावण लई, बिछुआ ते पायल पाणा।

 रब मेरे ... मेनू ..., लाल चुनर पा के आणा।

 

कमर कस लेवांगी ..., 

कमर कस लेवांगी, बांधे कमरबंद असि,

इतर दा करूँ छिड़काव;
तेरी दुलारी मैं वां ..., मेनू गले ते लगाणा।

 रब मेरे ... मेनू ..., लाल चुनर पा के आणा।

 

जे कछु दित्ता तूने ...

जे कछु दित्ता तूने ...तेनु मैं सौंप देणा,
करके नी सोलह श्रृंगार। 
तेरे चरणों में रब्बा, आके मेनू सो जाणा।

 रब मेरे ... मेनू ..., लाल चुनर पा के आणा।

 

एस डी तिवारी




ओ रब्बा .... ! वो ओ ओ ओ रब्बा  
मेनू होंदी कलेजे विच पीर

मेनू होंदी कलेजे विच पीर
ओ रब्बा आ सोच, किन्ना, रोई होगी हीर

घर दी दीवारां जालिम, होवांगी जेलखाना 
होगा बना जे दुश्मनसारा जमाना

घर दी दीवारां जालिमसिगीं जेलखाना 
होगा बना जे दुश्मनसारा जमाना
पांवा विच पड़ी होंगी, जकड़ी जंजीर

ओ रब्बा आ! किन्ना रोई होगी हीर


मंजी बिछौना छड, सोयी होगी धरती उत्ते

मंजी बिछौना छडसोयी होगी धरती उत्ते
सुध बुध खोई फिरदी, होगी वो इत्थे उत्थे 
दिल विच चुभोई होगी तीखी तीर। 
ओ रब्बा आ! किन्ना रोई होगी हीर


भरी हुई दिन विच, ताकी होंगी अक्खां

भरी हुई दिन विचताकी होंगी अक्खां
काली काली रातां, काटी होंगी कल्लां
झर झर बहाई होगी नयनन तों नीर। 

ओ रब्बा आ! किन्ना रोई होगी हीर

खाना ते पानी दी, भूख ना प्यास होगी
रांझणा दे आवन दा, हरदम ही आस होगी
अंसुअन भिगोई होगी, देह उत्ते चीर। 
ओ रब्बा आ! किन्ना रोई होगी हीर

ले के फरियाद अपनी की, होगी पुकार तेरी

ले के फरियाद अपनी की, होगी पुकार तेरी
माथा पटक के साईं, लेवण अरदास तेरी 
बनके मोहब्बत दी कंगली फ़कीर
ओ रब्बा आ ! किन्ना रोई होगी हीर


लोकां दी सताई होगी, होगी मजबूर वो

लोकां दी सताई होगीहोगी मजबूर वो
जहर दा निवाला खाई, हुई मशहूर वो  
प्रेम दिवानी की लिखी कैसी तकदीर
ओ रब्बा ! किन्ना रोई होगी हीर


एस डी तिवारी