SD Tiwari
Tuesday, 28 April 2026
Naari
Friday, 17 October 2025
Chhath geet
छठ गीत
जनि बईठा हो सुग्गा घवद पर, केला जाई जूठियाय।
दउरी में भर के ले जइबों, चढ़ावे के हो छठ घाट।
चढ़इबों उ केला छठी माई के, तोके देबों परसाद।
फल फूल खीर अउर ठेकुआ, छठी माई के भाय।
छठ माई सहाय सुरुज क, जग के करे उजियार।
देवी होलीं खुश पाय अरघिया, सूरज डूबे उतराय।
धरती पर बहुते विशेष होखे, रविशष्ठी त्यौहार।
कईला से पूजा छठी माई क, संतति सम्पति भर जाय।
मैया देलिन वोकरा आशिषिया, महिमा करे जे प्रसार।
रखे संयम नियम से छठ पूजा, सुखी घर परिवार।
डॉ. एस. डी. तिवारी
गलती
क पुतला बानीं। हजारों गलती करत बानीं।।
देवी मईया क्षमा करिहा। हमरा के क्षमा करिहा।।
अज्ञान
समझ के क्षमा करिहा।
अबोध
समझ के क्षमा करिहा।
पूजा
क ढंग न जानीं। तन्त्र अउरी मन्त्र न जानीं।।
बालक
समझ के क्षमा करिहा। याचक
समझ के क्षमा करिहा।
तोहरा के जे भी पुकारे। ओकरा के तॅू पार उतारे।।
अपराधी समझ के क्षमा करिहा। पापी समझ के क्षमा करिहा।।
भूल
से जे जवन कईल। शरण में तोहरी गईल।।
मूर्ख समझ के क्षमा करिहा। पुत्र समझ के क्षमा करिहा।।
करे
वाली सबकर रक्षा। प्रेम से लीहा हमरो पूजा।।
बुद्धिहीन समझ के क्षमा करिहा। दीन समझ के क्षमा करिहा।।
रउआ
त जग क जननी। रउए जग के जगमगवलीं।।
मां
हमरी पर दया करिहा। सब
अपराध क्षमा करिहा।
मईया
हमरा के क्षमा करिहा।
अज्ञान
समझ के क्षमा करिहा।।
Saturday, 9 August 2025
Laal chunar pa ke / royi heer
ओ रब मेरे ...!
ओ रब मेरे ... ! मेनू .., लाल चुनर पा के आणा।
मेनू ना भावे रब ...,
मेनू ना भावे रब ..., चीटिया चुंदरी,
नाइयों दूधिया लिवास;
माथे ते टीका वे, मांगां विच सिन्दूर पाणा।
ओ रब मेरे ... ! मेनू ..., लाल चुनर पा के आणा।
चोटी मैं गूंथूं वे ...,
चोटी मैं गूंथूं वे, गजरा सजावां नी,
केशां नु .. लेवांगी संवार;
लागे ना नजर कोई ..., अक्खां विच काजल पाणा।
ओ रब मेरे ... ! मेनू ..., लाल चुनर पा के आणा।
नाक ते नथनी वे ...,
नाक ते नथनी वे, कानां वीच झुमका,
गर्दन ते डालांगी हार;
हाथां ते हीना वे, कलाई विच चूड़ी पाणा।
ओ रब मेरे ... ! मेनू ..., लाल चुनर पा के आणा।
बाहां सजावां नी ...,
बाहां सजावां नी ..., पहुंचा भुजदंड पहणा,
उंगल विच मुदरी डाल;
पांव सजावण लई, बिछुआ ते पायल पाणा।
ओ रब मेरे ... ! मेनू ..., लाल चुनर पा के आणा।
कमर कस लेवांगी ...,
कमर कस लेवांगी, बांधे कमरबंद असि,
इतर दा करूँ छिड़काव;
तेरी दुलारी मैं वां ..., मेनू गले ते लगाणा।
ओ रब मेरे ... ! मेनू ..., लाल चुनर पा के आणा।
जे कछु दित्ता तूने ...
जे कछु दित्ता तूने ..., तेनु मैं सौंप देणा,
करके नी सोलह श्रृंगार।
तेरे चरणों में रब्बा, आके मेनू सो जाणा।
ओ रब मेरे ... ! मेनू ..., लाल चुनर पा के आणा।
एस डी तिवारी
ओ रब्बा .... ! वो ओ ओ ओ रब्बा
मेनू होंदी कलेजे विच पीर।
मेनू होंदी कलेजे विच पीर।
ओ रब्बा आ सोच, किन्ना, रोई होगी हीर।
घर दी दीवारां जालिम, होवांगी जेलखाना।
होगा बना जे दुश्मन, सारा जमाना।
घर दी दीवारां जालिम, सिगीं जेलखाना।
होगा बना जे दुश्मन, सारा जमाना।
पांवा विच पड़ी होंगी, जकड़ी जंजीर।
ओ रब्बा आ! किन्ना रोई होगी हीर।
मंजी बिछौना छड, सोयी होगी धरती उत्ते।
मंजी बिछौना छड, सोयी होगी धरती उत्ते।
सुध बुध खोई फिरदी, होगी वो इत्थे उत्थे।
दिल विच चुभोई होगी तीखी तीर।
ओ रब्बा आ! किन्ना रोई होगी हीर।
भरी हुई दिन विच, ताकी होंगी अक्खां।
भरी हुई दिन विच, ताकी होंगी अक्खां।
काली काली रातां, काटी होंगी कल्लां।
झर झर बहाई होगी नयनन तों नीर।
ओ रब्बा आ! किन्ना रोई होगी हीर।
खाना ते पानी दी, भूख ना प्यास होगी।
रांझणा दे आवन दा, हरदम ही आस होगी।
अंसुअन भिगोई होगी, देह उत्ते चीर।
ओ रब्बा आ! किन्ना रोई होगी हीर।
ले के फरियाद अपनी की, होगी पुकार तेरी।
ले के फरियाद अपनी की, होगी पुकार तेरी।
माथा पटक के साईं, लेवण अरदास तेरी ।
बनके मोहब्बत दी कंगली फ़कीर।
ओ रब्बा आ ! किन्ना रोई होगी हीर।
लोकां दी सताई होगी, होगी मजबूर वो।
लोकां दी सताई होगी, होगी मजबूर वो।
जहर दा निवाला खाई, हुई मशहूर वो।
प्रेम दिवानी की लिखी कैसी तकदीर।
ओ रब्बा ! किन्ना रोई होगी हीर।
एस डी तिवारी