Sunday, 18 June 2017

Saat vachan

सात वचन


धर्म कर्म जो करेगा तू,  मुझे तेरा साथ निभाना पिया।
तीरथ व्रत पर जाये तू, हमका संग लिए जाना पिया।

तेरे बालक से लेकर मैं, सारे कुटुंब की सेवा करुँगी
मेरे मात पिता का तू भी, सत्कार किये जाना पिया।

व्यंजन अच्छे खिलाऊंगी, मैं रखूंगी तेरा ध्यान सदा
जीवन भर निष्ठा से तू, मेरा साथ दिए जाना पिया।

तेरे लिए श्रृंगार करुँगी, मैं तेरे संग में क्रीड़ा करुँगी
मेरे पालन के दायित्व को, नित तू भी निभाना पिया।

सब्र व धीरज से रहूंगी, तेरे संग सुख दुःख सहूंगी
जो कुछ कमाना, पूछे बिन उसे नहीं उड़ाना पिया।

सास ससुर की सेवा करुँगी और तुझे कभी न ठगूंगी
सखियों के बीच तू मेरी, खिल्ली नहीं उड़ाना पिया।

तेरी इच्छा अनुरूप रहूंगी, तभी पति माना तुझको
किसी स्त्री से तू और, कदापि न नैन लड़ाना पिया।

दिल और मन को काबू में रखना
आठवीं बात कभी जुबान पर भी नहीं लाना पिया।


resting in his net
waits for mosquito to bed
the hungry spider

Tuesday, 13 June 2017

Gareebi haiku / gharelu


मेरे घर में
रहते चूहे बिल्ली
फिर भी मेरा

किया उत्पात
कुतर के कपडे
चूहे की जात

देख के डरी
गृहिणी के मकड़ी
हाथ में झाड़ू

एक कमरा
माँ बाप बेटा बहू
बीच में पर्दा

पुरानी साड़ी
बनकर के पर्दा
टांड पे टंगी

पुराने वस्त्र
रक्खी बांध गट्ठर
बर्तन हेतु

बच्चों से घिरा
कटता तरबूज
फांक के लिए

फ्रिज की चोरी
बबली की चुगली
पकड़ी गयी

पुरानी पैंट
बनाई काट कर
माँ ने निकर

सारी कमाई
रख के आधे पेट
खा गयी दवाई

दान में मिला
इस सर्दी कम्बल
वह भी फटा 

कर दी आज 
दोनों की खटपट 
रसोई बंद 

धुल न पाई   
सोनी की यूनिफार्म 
स्कूल की छुट्टी 

बातों में लगी 
चूल्हे को बुझा दिया 
दूध उफन 

महक आई 
छोड़ भागी रसोई   
धारावाहिक 

जोर का लगा
बिजली का झटका
देख के बिल

चाय समोसा
आये मेहमानों ने
खूब भकोसा

गुड़िया दुखी
उसकी गुड़िया की
टंगरी टूटी

देख के खाली 
पड़ोसन के जा ली  
चीनी का डब्बा

द्वार भिखारी
भीतर चली गयी
बोल के सारी


गुड़िया रूठी
आया न उसका


************

नग्न दिखता
आदमी गरीबी में
स्त्री अमीरी में

गरीब खाता 
बात बात पे चांटा 
बगैर खता 

आंसू बहाता 
गरीब  का ना होता 
पोंछने वाला  

चिंता में जीता 
घर में होती बेटी 
निर्धन पिता 

सयानी बेटी 
रातों की भी ले लेती 
दीन की नींद 

दोनों न देना 
गरीबी व लड़की 


साथ में खुदा  
  
रखता पास 
बेशक न हो धन 
गरीब दुआ 

दिखा जाता है 
गरीब जान कर 
कोई भी आंख 

धनी को मिट्टी  
बीमार कर देती 
दीन का खेल 

होता है भूखा  
गरीब दो रोटी का 
धनी धन का 

पति के साथ 
कट गयी तंगी में 
बेटे से आस 

बिखरा दूध 
दाल पीकर सोया
रात में शिशु

थाली की रोटी
लेकर भागा कुत्ता
रो रहा बच्चा

मिली है साडी
तीन साल के बाद
होली पे नयी

दुकान पर
बेटे की पढ़ाई में
चांदी का कड़ा

बिल्ली भी जाती
गरीब के ही घर
कुछ पा जाती

थोड़ी सी दही
पानी नमक डाल
अटाई मट्ठा

सूखे की मार
दोनों नन्हों को ले के
मायके गयी

Wednesday, 31 May 2017

Haiku june 17 // golakar / sawan



घटा ने घेरा
उदंड सूरज का
गरूर घटा

मुंह की खाया
दिखाने के लायक
रहा न मुंह

कृष्ण मुरारी
मम संकट भारी
हरो हे कृष्ण !

पेट ख़राब
बैठी है छुट्टी पर
थाम के पेट

मेरा ये घर
रहते चूहे बिल्ली
फिर भी मेरा

चूहा ढूंढते
घर के सब लोग
मरा है चूहा

बिल्ली से डर
चूहा बक्से के नीचे
ढूंढती बिल्ली

कांटा की खोज
निकालने के लिए
पांव का कांटा

नशा से शीघ्र 
बेहोश कर देता  
धन का नशा 

गाड़ी पे नाव
कभी तो कभी होती
नाव पे गाड़ी

गांव से दूर
याद आया बहुत
मुझको गांव

गये जबसे
तुम दूर हमसे
शुकुन गये

पढ़ के गीता
सन्मार्ग नहीं सीखा
रहे निपढ़

होली क्या खेली
मलवायी गुलाल
संग में हो ली

दिल से खेला
गया छोड़ अकेला
तोड़ के दिल

छंटा जो मेघ
चांदनी ने बिखेरी 
नभ में छटा 

घटा जो घेरी 
सूरज का प्रकाश
दिन में घटा

टूटा खिलौना
नन्हें मुन्ने का मन 
देख के टूटा

हार पहन 
फूलों का गए हम  
दिल को हार 

पालक साग 
विटामिन के साथ 
स्वास्थ पालक 

बना जो चना 
किताब पढ़ कर  
खाये ना बना 

घना था साया 
उस पर दुखों का 
सताया घना

पर के बिना 
परिंदे का जीवन 
टिकठी पर 

भाषा अनेक 
हँसते रोते सभी 
एक ही भाषा 

सम्मान दोगे 
मिलेगा दूसरों से 
स्वतः सम्मान 

कल मिलेंगे 
बोल गये परसों 
आये ना कल 

मलिन मन 
रखोगे तो जीवन 
होगा मलिन 

आज का काम 
होता वही कर्मठ 
करे जो आज 

जल जीवन  
प्रलय भी लेकर  
आता है जल 

जल के बिन 
जग ये एक दिन 
जायेगा जल 

वट का गोदा 
जम के खड़ा होता 
विशाल वट

सुन्दर व्यक्ति 
अंधकार में भी जो 
लगे सुन्दर 

बंशी बजाई
गोपियाँ दौड़ी आईं 
सुन के बंशी 

दुनियां वालो 
तुम्हारी ना जागीर 
यह दुनिया 

आग जला के 
नित बुझाती पत्नी 
पेट की आग 

वन में फूला 
बसंत में पलास 
दहका वन 

मन की बात 
किससे कह डालूं 
चिंता में मन 

बुरा करोगे 
किसी और का, होगा   
तुम्हारा बुरा

बैर करके 
बदले में उसके 
मिलता बैर  

पशु ना बनो
तुम उनके साथ 
वे हैं ही पशु 

धर अधर
सुना दो मीठी तान 
मुरलीधर 

अधर चले 
रजनी गहराते 
छूने अधर 

दिल अटका
उन जुल्फों में छोड़ा
अपना दिल

पूरा खा गया
सामने जो परोसा
पड़ा ना पूरा

लौ लग जाती
पतंगों को लौ देख
जलाती भी लौ

रिश्ते निभाना 
हो रहा है मुश्किल 
टूटते रिश्ते 

पता नहीं है 
कहीं बरसात का 
नदी लापता 

मेरा जीवन 
है कितनों का ऋण 
फिर भी मेरा 

शाम ले आई 
नभ में अरुणाई 
शर्मायी शाम 

जग के सूर्य 
किरणें बिखराता
रौशन जग 


खोल मीडिया 
कैमरे का ढक्कन 
आंखे दे खोल 

प्यार में मग्न
लगा के ऊँची पेंग  
झूलता प्यार 
  
एक से जले 
दीपावली की शाम 
दीये अनेक


छांटा जो मेघ टा 
चांदनी ने बिखेरी 
नभ में छटा 

दर्द उभरा 
मुआ सोने न दिया 
रात में दर्द 

पानी के लिए 
मृग मरू में दौड़ा 
मिला न पानी 

जूता खरीदा 
लंगड़ी हुयी चाल 
तंग था जूता 

खाट में घुसी 
खटमल की टोली 
धुप में खाट 

द्वार जो खोला 
अजनवी सामने 
बंद की द्वार 

प्रेम के मारे 
राधा भई दीवानी 
कान्हा से प्रेम 

जीत की ख़ुशी 
दिमाग फिर गया 
पची न जीत 

दादा की छड़ी 
कभी सहारा ले के 
चलते दादा 

पीठ पे लदा 
बस्ते का बोझ भारी 
कोमल पीठ 

परीक्षा दिया  
पेपर हुआ लीक 
रद्द परीक्षा 

वक्त का फेर 
जाने कब किस्मत 
फेर दे वक्त 

घडी की देख 
दफ्तर देर  

चाँद 
पिया 
दिया 
धरा 
हवा 
मारा 
कर 
चैन 






दिल से खेली
सुगंध बिखरा के
फूल चमेली

हरसिंगार
रखे भेषज गुण
असरदार

लगा हो द्वार
लगाता चार चाँद
हरसिंगार

वन के बन
रंगीन आभूषण
सुहाता  टेसू


लगाता आग  
बसंत में वन में  
फूल पलास 

दहका दिल
वन का गया जब
पलास खिल

दोना पत्तल
ढाक के तीन पात

शव पे पड़ा
आंसुओं से नहाता
गेंदे का फूल

रखते व्रत
भक्त जन खाकर
कदली फल

एक ही बार
हाथी के मुंह पूरी
केले की घार

बेर

रखा गरूर
पहन के झुमके
पेड़ खजूर

लटके पड़े 
आम के पेड़ पर 
सोने के घड़े 

पेड़ के नीचे 
दो दिल बैठे 

मृत्यु पश्चात् 
वृक्षों का भी होता 
दाह संस्कार 

पेड़ से टूट 
देता है कटहल 
भूख का हल 

पीपल पेड़ 
घर में घुसी जड़ 
डाली तरेड़ 

डाल के झूला 
पेड़ पर निरहू 
ख़ुशी से फूला 



ताड़ का पेड़ 


नारियल का पानी

नदी से हो के
गर्मियों में बहती
गरम हवा

पहुंची सरि
नाचे झूम के सभी
समुद्री जीव

धुंध में घिरा
नभ चिंता में पड़ा
दीया उसका

निकले सारे
चाँद की बारात में
नभ में तारे

सितारे जड़ी  
आकाश की चुनरी  
मन मोह ली   

करने आते 
तारे टिमटिमाते 
बच्चों से बातें   

अटल खड़ा 
युगों से ध्रुव तारा  
नभ में अड़ा     

करते बात    
सप्तऋषि मंडल 
रहते साथ

कैसे बहती 
बून्द न टपकती 
आकाश गंगा 

आस में बैठा 
भोजन पर आंख  
गड़ाये कुत्ता 

कह के प्रथा   
कर देते हैं लोग    
पशु की हत्या 

कर्मयोगी तू 
छोड़ फल की चिंता 
कर्म किये जा 

कैसी ये रीत 
कुर्बानी देता कोई 
बलि किसी की 


भूमि पे गिरी 
भेजा जाँच के लिए 
रक्त की बून्द 



पुरानी मूर्ति 
बनी चींटी का घर 
नाक में मिट्टी  

गाड़ी चल दी 
हवा में लहराता 
नन्हां सा हाथ 

चांदी में खोया 
वो चांद से न मिला 
रहा ये गिला 

लम्बे समय  
नहीं छुप सकते 
सूर्य व सत्य 

छंट जाते हैं 
हवा जब चलती 
काले बादल 

रंग बटुर  
बना दिए नभ में  
इंद्रधनुष

ख़ुदा से खुद
खोदा जिसने पाया
खुद में ख़ुदा  

खुद पे डंडा 
लग जाता है जब 
हो जाता ख़ुदा

हिला रखा था 
हिल गया देख के 
अपनी मौत 

जबसे थामे 
पा गए कई हाथ 
तुम्हारा हाथ 

शिशु का स्पर्श :: सुख का अनुभव 

कट जाती हैं 
होने पर तन्हाई 
आँखों में रात 

यह सुगंध 
गुजरे वो तो नहीं 
यहाँ से कहीं 

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मैंने जो खाया   
कोई और लगाया 
वृक्ष का फल 

नहीं दिखता   
गर्म पानी में बिम्ब  
क्रोध में सच 

यहाँ से वहां 
नित टारती रेत 
मरू में हवा 

द्वार का पल्ला
चला हवा का झोंका
खुला धड़ाम 

चलते ही लू 
हवा रेत का खेल 
मरू में शुरू  


गर्मी में चले
मरम्मत के लिए
सर्दी के वस्त्र

आंधी में गिरा
छप्पर की खातिर
कटता पेड़ 


जल के बिना
नदी की तलहटी
भुनी मछली

महत्वहीन
मोती मनुष्य नदी
पानी विहीन

चाहिए जल
प्यासे व निर्लज्ज को
चुल्लू ही भर

जल का मोल
कितना अनमोल
प्यासा ही जाने

अँधेरा आता
मुझसे परछाईं
छीन ले जाता

जब भी देखी 
बनारसी जलेबी 
पाव खरीदी


देश दुनिया
कर देती तबाह
युद्ध कि राह

शांति का पाठ
पढ़ाता कबूतर
खोलो दिमाग

शांति की सोच
जगाया था कपोत
टला ना युद्ध

शांति दूत को
अनसुनी करता
इंसां मरता

देता सन्देश
ये कबूतर श्वेत
मिटाओ द्धेष

आया लेकर
सन्देश कबूतर
लड़ ना नर

उन्हें दे के आ
कबूतर जा जा जा
प्यार की पाती

तुमसे कहीं
आतंकवादी ! अरे !
ये पंछी भले
बिना जुबान रखे
देते शांति सन्देश

ख़ुदा ने भेजा
शांति का दूत बना
यह कपोत
आतंकवादी ! तेरे
जेहन बस मौत

सिवा पाप के
दहशत फैला के
कुछ न हाथ

पहना जूता
झांक रहा अंगूठा
किसी का दिया 



दीद चाँद का
बधाई हो बधाई
ईद है आई

रोजा से छूटे
पकवानों पे टूटे
ईद की पार्टी

नए कपडे
पहन बच्चे चले
ईद मिलन

बारिश आई
जी भर के नहाई
आज बसुधा

सका न बढ़
रोके रहे बादल
सूर्य का रथ  

बनी दर्पण   
दिखाती समाज का 
मीडिया बिम्ब 

धर अधर
सुना दो मीठी तान 
मुरलीधर 
अधर चले 
रजनी गहराते 
छूने अधर 

महत्वहीन 
मोती मनुष्य नदी 
जल विहीन  

आते ही गर्मी 
सूरज की बेशर्मी 
जलाने लगा 

जल में नहा 
साफ़ होता है तन 
देख के मन 

होते ही शाम 
जाने को जी बेकल 
मदिरालय 

जला डालती  
बड़ी रुई की ढेरी
छोटी सी लुत्ती


देश दुनिया   
कर देती तबाह 
युद्ध कि राह 

शांति का पाठ
पढ़ाता कबूतर  
खोलो दिमाग  

शांति की सोच 
जगाया था कपोत
टला ना युद्ध  

शांति दूत को  
अनसुनी करता 
इंसां मरता 

देता सन्देश 
ये कबूतर श्वेत  
मिटाओ द्धेष

आया लेकर  
सन्देश कबूतर
लड़ ना नर 

उन्हें दे के आ 
कबूतर जा जा जा 
प्यार की पाती


आया समय
सगे भी संपर्क में
फेस बुक पे

कितना बड़ा
देता भोजन पानी
प्रभु तू दानी

प्रार्थना पत्र
इस बार भी रद्द
बेरोजगार

स्वस्थ रहना
सर्वोत्तम उपाय
योग साधना

निरोग बना
करके ये शरीर
योग साधना

निखर उठे
बारिशों के पानी में
नहा के पौधे

किताबें लाई
किसी और की मांग
करी पढ़ाई

बर्तन मांज
अपना पेट काट
बच्चे ली पाल

जाल में पड़ा
जोह रहा मच्छर  
भूखा मकड़ा 


मारीच बने
आतंकी आगे बढ़े
वध का भय

हुए हिंसक
मानवता को मार
गो के रक्षक ? 

बरसे मेघ 
दिल हुआ दीवाना 
हरषे देख 

देखे बदरी 
चले घर से ले के 
साथ छतरी 

दिल ने चाहा  
बारिश में भीगना  
ताना न छाता

भिगोया मन 
बरस के बादल 
हम कायल 

ऊँची ली पेंग 
अब भी न छू पायी
दूर थे मेघ 

बारिश ख़त्म 
पत्ते सम्हाले हुए 
जल की बूंदें 

छुपा छुपाई 
छुपते ही बुलाई   
मुझको ताई

पाक है एक  
शरारतें करता 
शैतान बच्चा 

चाहता तुझे  
रोज मेरी खातून 
जैसे दातून  

कर लो प्रण
बचाना पर्यावरण 
भविष्य हेतु 
तुमने है जो पाया 
कोई और बचाया 


तांगे पे बैठ 
जाते पहाड़ गंज 
क्या था जमाना

दो मील तक 
स्कूल पैदल जाना 
क्या था जमाना  

***********


पी गयी सब
बारिश वो पहली
प्यासी धरती

चिंता में बीती
मग्गू की बरसात
मड़ई चुई

घेरी बदरी
सखि हो रहा मन
सुनूं कजरी

वर्षा बहार
मन गावे मल्हार
देख फुहार

सुन सखी री!
रोप डालेंगे धान
गा के कजरी


मन उदास
सूखा रहा आकाश
आये न घन


सावन आया
भू पे धाक जमाया
बरसा घन

वर्षा बहार
मन गावे मल्हार
देख फुहार

हुआ अँधेरा
छोड़ दी परछाईं
साथ ही मेरा

रामदुलारी/ प्राण सी प्यारी
चली गयी मायके
चैन की बंशी

*********8


स्वेद बहाया
रुधिर को सुखाया
रोटी के लिए

आ गये दूर
अपनों से बिछुड़
रोटी के लिए

करना माफ़
प्रभु! कमाया पाप
रोटी के लिए

जाने कितने
हम पापड़ बेले
रोटी के लिए

गरमी ठण्ड
बरसात भी झेले
रोटी के लिए

जग में आ के
खेले गजब खेल
रोटी के लिए

*********

औरों की छीनी
भरने को अपनी
पापी ये पेट

छीन ईमान
बनाया बेईमान
पापी ये पेट

नचा के रखा
कहाँ नहीं भटका
पापी ये पेट


बड़ा सताया
लीला जो भी कमाया
पापी ये पेट

दूर ले आया
अपनों को छुड़ाया
पापी ये पेट  

***********

बादलों ने दी
सूर्य को जमानत
कैद से छूटा

कल के दिन
कर के रखा मेघ
रवि को कैद

झांकता रहा
खिड़कियों से सूर्य
मेघ की जेल


बादलों ने दी
सूर्य को जमानत
कैद से छूटा

सावन फेंका
गगरी भर भर
भीगा अम्बर

आयी फुहार
रिमझिम करती
जगाई प्यार

बरसा घन
सावन की फुहार
हरषा मन

सूखा सावन
बरसा नहीं घन
तरसा मन

सावन आया
भू पे धाक जमाया
बरसा घन

वर्षा बहार
मन गावे मल्हार
देख फुहार


किला कालिंदी
क़ुतुब की बुलंदी
दिल्ली की शान 

शिवशंकर
दरश अभिलाषी
कशी के वासी  

************

लाता सावन
भर भर गागर
नहाती धरा

धरती धरा
सावन में नहा के
वसन हरा

वसुंधरा का
खिल जाता यौवन
नहा सावन

नहा धोकर
इतरा कर भूमि
ख़ुशी से झूमी

पृथ्वी को देख
सावन हुआ मुग्ध
सुन्दर मुख

************
इन्द्र ने मारी
भर के पिचकारी
भीगी धरती

जीवन ऐसा
धनवानों का पैसा
एक ही रट

जीवन सिंधु
उतारने की पार
गुरु है नाव

करे खनन
उपकरण बन
गुरु गुणों का



पेड़ पे बैठा
निरीक्षण करता
बाढ़ का पंछी

बरसात आई :: भूसे पर तिरपाल बिछायी

आई बौछार
खुली पड़ी खिड़की
भिगोई खाट

तानी छतरी
लटकी पड़ी नीचे
भीगी चुनरी

रोया बादल
काम करते भीगा
माँ का आंचल

खुश किसान
लहलहाता देख
खेत में धान

बादल घने
तप रहे धान का
आश्रय बने

हुआ मगन
बनायेगा कृषक
धान से धन

हमारी सोच :: विचारों में प्रतिबिंबित

ज्योति की ओर
देखो तो परछाईं
पीछे की ओर


दुनिया बोले
सावन का महीना
जै बम भोले

छाती पे खेलें
बूढ़ों की नाती पोते
हर्ष से फूले 


जीवन साथी
बुढ़ापे में साथ तो
जीवन खास

रामदुलारी
चली गयी मायके
चैन की बंशी

Tuesday, 16 May 2017

Motiyon ki ladi

मोतियन की लड़ी

गर्व से झूमी
मोतियन की लड़ी
गले में पड़ी

ले आये पिया
मोतियन की लड़ी
डोरी थी बड़ी

मुक्ता की माला
पहनी तो सास की
आँखों में गड़ी

कीमत बढ़ी
अंगूठी की जैसे ही
मोती से जड़ी

मोती की लड़ी
थी दुकान में धरी
मन में चढ़ी

सखी ले आई
मोतियन की लड़ी
अँखियाँ गड़ीं

मोती  का हार
खोया तो बह चली
अश्रु की झड़ी

कभी हार में
कभी ताज में मोती
जाकर मढ़े

जैसे ही मोती
हो जाता अनमोल
सीप से कढ़े

ग्रह की शांति
पहन के अंगूठी
मोती की जड़ी


कोई न मोल
रह जाये जो मोती
सीप में पड़ी

पहने हार
मन की शांति बड़ी
मुक्ता की जड़ी

चमक  रहा
अंगूठी में सफ़ेद
नन्हां सा चाँद


सीधे ही आई
प्रकृति से जो मोती
कीमती बड़ी

मढ़ी
खड़ी





तुम्हीं तो आये

नींद न आयी
रात देर सुलाने
तुम्हीं तो आये

किरणें भेज
होते भोर जगाने
तुम्हीं तो आये

भूखे थे हम
छींट अन्न खिलाने
तुम्हीं तो आये 

प्यास लगी जो
जल ले के पिलाने
तुम्हीं तो आये

नग्न थे हम
तन वस्त्र ओढ़ाने  
तुम्हीं तो आये

सुना था मन
बीच प्यार बसाने 
तुम्हीं तो आये

वर्षा बसंत
ये मौसम सुहाने
तुम्हीं तो लाये

प्यासी अँखियाँ
लिए छवि निराली 
तुम्हीं तो आये

जलने लगी
पृथ्वी को नहलाने 
तुम्हीं तो आये

काँपा ये जग
लिए धूप गर्माने 
तुम्हीं तो आये




तुम आ जाना

मुझमें पड़ा
खालीपन भरने
तुम आ जाना 

मुझे सुलाने 
रात लोरी सुनाने 
तुम आ जाना 

तुम्हें जोहूंगी 
कभी किसी बहाने 
तुम आ जाना 

नशे का घूँट 
भर प्यार पिलाने
तुम आ जाना 

रोउंगी जब 
मुझे चुप कराने 
तुम आ जाना 

सजी रहूंगी 
नजर को लगाने
तुम आ जाना 

बन सहेली 
पहेली सुलझाने 
तुम आ जाना 

करुँगी मैं तो 
गलती पे मुस्काने
तुम आ जाना 

मुरझा जाए 
मन मेरा खिलाने 
तुम आ जाना 

होऊं उदास 
तो हंसाने हंसाने 
तुम आ जाना 

Saturday, 29 April 2017

Haiku // sabji masale fool

माननीय सदस्यों / मित्रों, १ मई २०१७ से ३ मई २०१७ तक साहित्यिक मधुशाला के मंच को संचालित करने हेतु, एक बार पुनः मुझे आमंत्रित किया गया है। समूह के एडमिन व सदस्यों का आभार। तो १ से ३ मई २०१७ तक आप को  जिस विषय पर हाइकु लिखना है वह है  - 
'सब्जी' यानि कि  शाक, साग, तरकारी, भाजी आदि; सब जी !
जी हाँ, ३ मई तक सुन्दर भाव और बिम्ब डालकर स्वादिष्ट और गुणकारी सब्जी पकाकर आपको हाइकु के रूप में परोसना है। हाँ, किसी को कुछ पसंद होता है, किसी को कुछ; तो हर प्रकार की सब्जी परोसिये, चाहे करेला हो या कद्दू, क्या पता किसको क्या पसंद आये। और आपके हाइकु में खेत से लेकर रसोई, और मुंह तक जाने की यात्रा का कोई भी प्रसंग सम्मिलित हो सकता है। मेरा एक हाइकु - 

घर की भिंडी 
मिल रहा अपने 
स्वेद का स्वाद  

आपकी लेखनी से उत्तम, आनंद पूर्ण व रुचिकर हाइकु के सृजन की अपेक्षा के साथ, आपका -
- एस० डी० तिवारी  

इलायची की गंध 




बिकती सब्जी 
होती जिस रंग की 
जला के बत्ती 

मन करता 
खाने को कभी कभी 
बैगन भर्ता 


किसी का हाथ
बेशर्म बन आलू
लेता है थाम

नीचे को चला
थैले में टमाटर
गया मसला

होने पे बंद
सब्जी मंडी में शुरू
गायों का मेला

कड़वा लागे
पर करेला खा के
मधु तो भागे

सब्जियां हरी
पौष्टिकता से भरी
स्वास्थ वर्धक

बनी जो लौकी 
मुझे नहीं है खाना 
गुड़िया भौंकी 

साग पालक
विटामिन के साथ 
रक्तवर्धक  

रूला देती है
अपने हत्यारे को
कटती प्याज 

सुगंध भरी 
धनिया की चटनी
स्वाद अपनी 

बनी पालक
अनशन करके
बैठे बालक

हरा सलाद
भोजन में शामिल 
उत्तम स्वास्थ्य

घर की भिंडी 
मिल रहा अपने 
स्वेद का स्वाद 

बनी जो तोरी
नाक मुंह सिकोड़ी 
बिटिया मेरी  

किसी का होता 
कटे आलू बेचारा 
भोज भंडारा 

स्वाद जमाता  
आलू सब्जी का राजा  
सबके साथ 

चिढ़ता आलू 
खा जाता है करेला 
चीनी उसकी  

किसी का हाथ  
थाम लेती है प्याज 
हुई बेशर्म  

चले न काम 
मटर हो या चना 
प्याज के बिना   

भाता है मन 
भर कर बैगन 
तवे पे भुना 

भाई न सब्जी
मां व बेटी में ठनी
टिंडे की बनी

स्वाद से भरी
टमाटर पड़ के
सब्जी की तरी

जाते ही भिंडी
दिखाने लगी भाव
खेत से मंडी

सजा सलाद
ऊपर रखकर
धनिया पात



मूली गाजर

पक्का
आलू गोभी का स्थान

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कोफ्ता में डाला 
डाला गर्म मसाला 

विस्मृत सब
मसालों का मिश्रण
दादी का दिया

कम या ज्यादा 
कर देता बर्बाद 
नमक स्वाद 

सब्जी व दाल 
पा हल्दी की संगत  
पाते रंगत 

हींग तड़का 
लगते ही दाल में  
घर महका 

सबका हाल 
छींक कर बेहाल 
मिर्च की छौंक 
  
आधी अधूरी 
मसाले की दुनिया 
बिना धनिया 

बनाई पत्नी 
धनिया की चटनी 
महका घर 

मिर्च लगाई 
ऑंखें बुझाने आईं 
मुंह में आग 

देता सलाद 
बुरक काली मिर्च 
उत्तम स्वाद  

आम के साथ 
चटनी  का स्वाद 
लाता पुदीना 

खिल उठता 
जल जीरा का रंग 
पुदीना संग 

गर्मी में देता 
उदर को राहत
दवा पुदीना 


काली कलूटी 
बिना हल्दी के दाल 
स्वाद भी रूठी 

कई रोगों का 
मसालों में शामिल 
मेथी निदान 

सब्जी में पड़  
कई फायदे देती 
भेषज मेथी 

कई रोगों का 
आयुर्वेद में तोड़ 
जीरा बेजोड़ 

अजवाइन 
सब्जी होती सुपाच्य  
साथ में स्वाद 

गर्म मसाला 
थोड़ा सा ज्यादा डाला 
बदहजमी 

हींग तड़का
लगते ही दाल में
घर महका

सबका हाल
छींक कर बेहाल
मिर्च की छौंक

सर्दी में चाय 
अदरक डाल के 
सबको भाय 


गुणों के साथ  

लहसुन व प्याज 

स्वाद का राज


रखना पथ्य 
अधिक मसालों से 
वैद्य का कथ्य 


सब्जी क्या खाक 
मसाला नहीं डाला 


**************

श्वेत गुलाबी 
लगते हैं शराबी 
सेव के फूल 

लाये बसंत 
पतझड़ में भूल    
सेव के फूल 

रूप पे अलि
लुभाये चले आते   
सेव की कली 

गुणों का फल 
देता है एक दिन 
सेव का फूल 

लेकर खड़ी 
पांच पांच पंखुड़ी
सेव की कली 

8888888888888



लेकर खड़ी 
कचनार की कली 
पांच पंखुड़ी 

भाजी बनाने 
कचनार की कली 
बाजार चली 

लान सजा दी  
कचनार की कली  
नाजों की पली 

रंग बिखेर  
कचनार की कली 
बसंती हो ली 

रोगों में कई  
कचनार की कली  
गुणों की वरी

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गले में डाला 
गूँथ के वरमाला 
चंपा के फूल 

गुणों को जाना 
आयुर्वेद बखाना  
चंपा के फूल 

मानव सत्व   
दर्शाता पांच तत्व  
चंपा का फूल 

सुकून भर 
लेते तनाव हर  
चम्पा के फूल 

गमों से दूर 
लेकर चले जाते 
चंपा के फूल 



करते वास 
रंग रूप व बास  
चंपा के फूल  

गोरी का जूड़ा
महकाता चलता 
चंपा का फूल  

गंध से भरी 
हर एक पंखुड़ी 
चंपा की कली 

करता शुद्ध 
चमन चितवन   


चंपा का फूल 

नन्हां सा दिल 
लगती अनखिली 
चंपा की कली 

देवता देवी 
प्रसन्न कर देती 
चंपा की कली