Wednesday, 6 September 2017

Haiku pyar 6

हम सागर
लाएंगे उठाकर  
तू प्यासी गर

खास है बड़ी
तू क्या देगा सौगात
आज की रात

करती रही
मंहगी मुहब्बत
रोज गरीब

बनाया अँधा
तेरा इश्क न छोड़ा
काम का बंदा

इत्र लगाए
जब वो पास आये
छींक आ गयी

हुस्न न होता
सोचता हूँ होती क्या
फूलों की कद्र

तेरा दीदार
जबसे हुआ यार
मैं तो खो गया

सनम आया
जैसे ही हुई शाम
चाँद शर्माया

नन्हां सा दिल
सम्हालता भी कैसे
तुम्हारा प्यार

आ नहीं पाया
दिया नहीं था पता
मेरी क्या खता

झटका तूने
जकड़ गया दिल
जुल्फों में तेरी

हमसे अच्छे
तेरे गले से लगे
मोती के दाने

हुस्न के खुदा
रहना है मुश्किल
तुमसे जुदा

गयी थी मारी
थोड़ा साथ न चले
मति तुम्हारी

हुआ बेचारा
रस के लिए भौंरा
दल में कैद

ननदी सुन
चूड़ी की खनखन
हंस पड़ती

भेद खोलतीं
खनक के चूड़ियां
आधी रात को

जेब से प्यार
बीबी को बेसुमार
मुझसे कम

शादी के बाद
खुल जाती हैं ऑंखें
प्यार में बंद

राम दुलारी
चली गयी मायके
चैन की बंशी

उलटी हुई !
तू है कितनी भोली
पेट से हो ली

कैसे उठाऊं !
तेरे प्यार का भार
पैर हैं भारी

रूठ गए तो
समझे थे उनसे
गहरे रिश्ते

मेरी जिंदगी
पाकर तेरा साथ
उड़ने लगी

मेरी नजर
देखते धुंधलाई
तेरी डगर

दिल में लगा
मुहब्बत की आग
रौशन किया

उससे कहीं
मेरा पालतू अच्छा
मैं नहलाता


स्वेद से भीगे
एक ही थी रुमाल
मुख थे पोंछे

गोली के जैसे
मारने निकलता
दिल से प्यार

जबसे मिली
तेरी मेरी केमिस्ट्री
हो गया प्यार

मन की चाह
देखते ही सूरत
हो गया प्यार

कैसा अचम्भा
मारकर भी प्यार
रहता जिन्दा

धीरज रखा
डाल कर कंटिया
फंसी मछली

बिकता नहीं
पर बड़ा चुकाया
तो प्यार पाया

प्यार में वक्त
जाने कहाँ खो जाता
वक्त में प्यार

पाए थे हम
आलिंगन में बंध
चौथा ही लोक


सज ना गोरी
लुभा न जाएँ कहीं
सजना तोरी

बेचैन जिया
जिया क्या खाक जिया
नहीं थे पिया

प्यार जताया
परछाईं बन के
करती पीछा

पाया ही नहीं
चुम्बन का जानेगा


वह क्या स्वाद

सज ना गोरी
लुभा न जाएँ कहीं
सजना तोरी

बेचैन जिया
जिया क्या खाक जिया
नहीं थे पिया

प्यार जताया
परछाईं बन के
करती पीछा

शुरू हो जाये
रोक पाना मुश्किल
युद्ध व प्यार

प्यार था मुझे
उसकी मुस्कान से
शादी उससे

दौड़ लगाए
बहुत जख्म खाये
प्यार में अँधा

नाचते रहे
हम दोनों एक ही
प्यार की धुरी

कितने अच्छे
सपनों  में आते थे
तुम लगते

करके प्यार
पाए उनसे युदा
मेरे विचार

दिल चुम्बक
खींचे दूजे की ओर
तेरा या मेरा ?

हरेक दिन
लगता तुम बिन
जीवन सूना

बीत ही गए
वो सुन्दर लमहे
यादें संजोये

खेने को मेरी
दे दे तू पतवार
प्यार की नाव

आने न देंगे
प्यार में पतझड़
बदले ऋतु

बंद है राह
स्वर्ग में तो मिलोगी
वहां से आगे

मैंने ना सही
छू ली उसके होंठ
मेरी कविता

भाये तुमको
जाने कौन सा फूल
ये लो बगीचा

गहरी सोच
तेरे नाम के सिवा
कुछ ना और

मेरी चाहत
तुम्हारी चाहे नोट
तुम्हारे होंठ

दे देना मुझे
दिल में गर रखो
उमर कैद

मेरा प्यार या
ग्रहों का चमत्कार
पा लिया तुझे

सोना न हार
चाहूँ पिऊ मैं बस
तुम्हारा प्यार

रहे देखते
किसी पे मचलते
उनका दिल

हो जाता और
सुन्दर हर ठौर
तुम्हारे साथ



***********

जगा स्पंदन
पुलकित बदन  
तेरा चुम्बन 

सफल हुआ
पाकर के जीवन
तेरा चुम्बन

बड़ा नशीला
ऊपर से खर्चीला
तेरा चुम्बन

कुछ पल को
भुला दिया संसार
तेरा चुम्बन

किया वहन
पाने को कष्ट मन
तेरा चुम्बन

पाने के लिए
क्या ना पापड़ बेले
तेरा चुम्बन

करने लगा
दिल नृत्य मगन
तेरा चुम्बन


हुए बेकार
आदमी थे काम के
करके प्यार



रहे देखते
किसी पे मचलते
उनका दिल

हो जाता और
सुन्दर हर ठौर
तुम्हारे साथ

दिल लगाया
बदले में उन्होंने
फंदा लगाया

दिल ने पीया
तेरा इश्क बहुत
नशे में जिया

मिले तुमसे
सोचे  नहीं थे होगे
इतने प्यारे

किया है मैंने
कहानी भी बनेगी
मेरे प्यार की

हाथ न आया
दीवाना कहलाया
इश्क का छोर

हुआ असर
तेरे प्यार में दिल
आसमां पर

उन्होंने पूछा
हमें लगा प्यार है
नाराज हो क्या ?

हुआ कमाल
आँखों में ऑंखें डाल
देखा उनको

मिले तुमसे
पता न था पहले
इश्क कि चीज

प्यार की नाव
खेती है पतवार
विश्वास जड़ी

नहीं तड़पे
कोई प्यार करके
ढूंढ के लाओ

तुझे भुलाएं
यह तभी संभव
मौत आ जाये

जिंदगी भर
नहीं पाया उतर
आँखों का नशा

सताते रहे
हम उनसे प्यार
जताते रहे

किससे किये
बादल तुम प्यार
रोये थे रात

पागल बन
दिल ने उन्हें चाहा
फिर कराहा

दिल चुराए
अब फिरते हैं वो
आंख चुराए

सूना तुमने
टूटने की आवाज
मेरा दिल था

शब्द तुम्हारे
कहीं के नहीं छोड़े
तुमसे प्यार

सामने ही थे
अजनबी से रहे
किससे कहें

होंठ सिले थे
दिल बोलता रहा
नहीं सुने वे

जिसको पाया
दर्पण हरजाया
गले लगाया

मेरा वो थूके
उनका गुस्सा हम
प्यार ना कम


हुआ है दीद
जबसे नम का
खो गयी नींद

फैली ये बाहें
थामने को तुझको
रखे हैं चाहें

ले ले बाँहों में
गले लग जाउंगी
गल जाउंगी

सिर मैं फोड़ी
मुंह खुलवाने में
चुप्पी न तोड़ी

दिल ने कुछ
आँखों ने कुछ कहा
हमने पढ़ा

ज्योति से भरा
दिल का हर कोना
तुम्हारी ही लौ

डरता दिल
पाया बड़ी मुश्किल
खोये न फिर


इश्क में हुई
गमों कि बरसात
अश्कों की नदी

सब कुछ है
एक वो नहीं पास
दिल उदास

किये थे गर्व
वफा पर हम भी
चोट से पूर्व

किस्मत वाले
मर जाते जो लोग
हुस्न के मारे


चले मुस्करा
टूट कर बिखरा
दिल किसी का

जाने ना किसे
रहना मुस्कराते
प्यार हो जाये

साथ ले गए
करके वो तारीफ
मेरी मुस्कान

अकेले रहे
मुस्कराता भी रहे
कौन है भला

क्या है अनोखा
कह रहे हो खाया
प्यार में धोखा

दिल पे खोदा
रोओगे नहीं तो क्या
नाम किसी का

मेरे ऊपर
बरसाई तू प्यार
भीगा पड़ा हूँ

बदले दिया
गम किस बात का
दिल के दिल

एक मुस्कान
लूट कर ले गयी
सारी दुकान

एक ना किया
दिल का आशियाना
उजाड़ दिया


सावन आया
दिल में लगी आग
बुझाने आ जा

तेरे कारण
हो गए बदनाम
तू अनजान

तेरे ही दिए
आंसुओं में ढलके
दर्द मन के

जैसे कि खाद्य
प्यार भी जिंदगी की
जरूरी बात

*********


कुर्बानी दिए
कितने ही दीवाने
प्यार के लिए

छीनी यम से
दमयंती तप से
नल के प्राण

लौटाई खाली
पति को लेने आये
दूत सावित्री

मैरी व क्यूरी
रेडियम खोजते
प्यार में खोये

अनारकली
हार गया सलीम
सुन्दर बड़ी

हेलेन की लौ
पेरिस ने लगाया
ट्रॉय का युद्ध

करके इश्क
रोमियो जूलिएट
हुए अमर

प्यार बेहद
मजनू त्यागा प्राण
लैला की दर

प्यार का चिन्ह
खड़ा शाहजहां का
तालमहल

प्यार में संग
विक्टोरिया अल्बर्ट
रानी व रंक

सिरीं को मारा
झूठ से फरहाद
मौत के घाट

*******


खो गया था मैं
तुम्हारे संग बैठ
तारों को देख

सुन के देख
लेती तेरा ही नाम
मेरी जुबान

चलाती मेरे
दिल की धड़कन
तेरा चिंतन

माल चलेंगे
साथ में हम दोनों
चाट चखेंगे

करते प्यार
प्रेम भरे दो दिल
जलते यार

जीत उसी की
है जीवन को हारा
प्यार में जो भी


मुझे भर लो
ऑंखें बंद कर लो
बाँहों में तुम

दिल ने दिया
एक मीठा सा दर्द
दिल ही दवा

सेजिया मोरी
सर्दी में सूनी किया
बेदर्दी पिया

सोने न देता
पढ़ाने में जालिम
प्रेम का पाठ

जब से हुआ
हम दोनों का सिला
शकुन मिला

तुम जो गये
सपने हुए चूर
हमसे दूर


लो पहन लो
टांक दिया बटन
टूटी पड़ी थी

गाओ ना वही
पहली बार मिले
गाया था गीत


तेरी नजर
बन कर खंजर
दिल भीतर

जब से हुआ
हम दोनों का सिला
शकुन मिला

निकल आये
देखो चाँद सितारे
अब तो चलें

देखती रहीं
दोनों की आंखें चाँद
युदा होकर

हर सुबह
आज कल मेज पे
एक ही प्याली

सर्दी की रात
रजाई में मिलतीं
दोनों के सांसें

कह के गयी
लो मायके जा रही
मन में हंसी

निभायी साथ
उदासियों में मेरी
तुम्हारी याद

दोनों में अब
अदभुत सी शांति
अभी निपटे

फूल खिलते
होठों पर दोनों के
गले मिलते

वो जब गये
बंद हुआ छत पे 
चाँद का आना

लेकर आई
सिसकियों की रात
उनकी याद

किये बहुत
जजबातों से खेल
निर्दयी मेघ

होती प्रतीक्षा
शाम की हरदम
जवां थे हम

ढोता रहता
ट्रक पे ड्राइवर
यादें उसकी /प्यार

डाल से टूट
काम में आते फूल
पूजा व प्यार


सर्वोत्तम सहारा


बितानी है उम्र, तुम बिन :: पल पल भारी

रूठना तेरी अदा  :: मनाना मेरी कला

प्यार के लिए
जिंदगी है जरूरी
मौत से दूरी



राधा कान्हा की
हो गयी महबूबी
प्रेम में डूबी

राधा ने खेली
कृष्ण के संग होली
भिगो ली चोली

सीखीं गोपियाँ
रचा कान्हा से रास
प्रेम का पाठ

चुराया दिल
राधा का चुप चाप
माखनचोर

सीता व राम
प्यार में रंग नहीं
राग का काम

भोर  से शाम
पुकारती थी राधा
प्रेम में श्याम

पाने को राधा
की क्या क्या न उपाय
कान्हा का प्यार

कान्हा ने मारी
राधा पे पिचकारी
भिगोई साड़ी

कर अर्पण
कन्हैया को जीवन
मीरा मगन

हुई अमर
कृष्ण से प्रेम कर
मीरा दीवानी

मोहा राधा का
और मेरा भी मन
मनमोहन 

बांध के साथ
रखता परिवार
वह है प्यार

नन्हां बालक
खिंच लेता सबका
प्यार नाहक 

जब भी बजी
गाई तेरे ही गीत
मन की बीन

जाये न बीत
बसंत मनमीत
आ जा भी अब 

खोज ही लेती
गंध से छुपी कली
भौंरे की दृष्टि

कोरी अंगिया
लगा दिया तू दाग
मन बसिया

समुद्र तट
आते ही उठ जाता
दिल में तूफां

होता है सदा
प्यार नम्र व नर्म
अकड़ा गर्व 

जबसे हुआ
जिंदगी चल पड़ी
तुमसे प्यार

करके प्यार
तुमसे तो हो गया
जीना दुस्वार

हो गया प्यार
छा गया दिल पर
तेरा खुमार

हुआ जबसे
बजे दिल के तार
तेरा दीदार

फंस ही गया
दिल गली के तेरे
मार के फेरे


संगीत बिना
पिया गया विदेश
सुनी है वीणा

पकड़ी गयी
तेरे नैनों की चोरी
झुकाई गोरी 

जागा या सोया
रहा नशे में खोया
नाम के तेरे

होगा ये जग
रहें प्यार से सब
कितना प्यारा

दिल को तुम
बंजर ना होने दो
प्यार उगाओ

तू-तू मैं-मैं में
बीते न ये जिंदगी
प्यार जरूरी

निकला चाँद
ढूंढते रहे दाग
अस्त हो गया 

छोटी गलती
रूठ के मत जाना
रहूं जो रोती

तोड़ दे भले
रौंद न मेरा दिल
पैरों के तले


कैसे सम्भालूँ
तुम्हारे छोड़े तीर
बड़े गंभीर

शिकवा गिला
भेजा शुभ सन्देश
बदले मिला 

दामिनी है वो
छूना मत दामन
जल जाओगे

खाये जा रही
आकाश बेल बनी
उनकी याद

भूलना चाही
और भी गहराई
उनकी याद

रोजाना शाम
कर लेती है नाम
उनकी याद

रुलाती रही
रातों में आती रही
उनकी याद

मेरी किताब
आंसुओं से भिगोई
उनकी याद

खाने का स्वाद
कर देती बर्बाद
उनकी याद

उनका दिया
सम्हाले हूँ सौगात
उनकी याद


अपना बचा
निकाल रहा मेघ
हमारा स्वेद

बेटी ही धन
दुल्हन को सहेज
छोड़ दहेज़

अच्छा था रानी
काम वाली का नाम
कह तो लेते

बहुत खूब
तेरा सुन्दर रूप
फिसले हम

आ रहा पास
मगर धीरे धीरे
चाँद सखी रे

आँखों के बाण
मारो ना प्रियतम
निकले प्राण

कीं शरारत -
नाचने लगा दिल
आँखों ने तेरी

जबसे देखा - 
बेक़रार है दिल
आँखों को तेरी

जादू सा पाया
पागल हुआ दिल
आँखों में तेरी

पिया जो प्याला
होश खो बैठा दिल
आँखों का तेरी 

मिल के सीखा
प्रीत की रीति दिल 
आँखों से तेरी

Tuesday, 5 September 2017

Gurugram me


इश्क करना दिल ने सीखा, गुरुग्राम में।
कहीं ना, जैसा हुस्न देखा, गुरुग्राम में।
चहका खिल, बहका कहीं नजारों में दिल,  
इश्क वाली गजल लिखा, गुरुग्राम में।
छैल छबीली, नजर कटीली, अलबेली,
बोली जैसी, मिर्चा तीखा, गुरुग्राम में।
डिस्को, माल, फ़ूड,  फन, पब और बार,
दिल कहाँ? दिल ये चीखा, गुरुग्राम में।
कार बड़ी, बेकार बड़ी, ट्रैफिक जाम में,
मानो बसा पैरिस, अमेरिका गुरुग्राम में।
तितलियों सी रंग बिरंगी, साइबर गर्ल,  
लगता परीलोक सरीखा, गुरुग्राम में।

Sunday, 3 September 2017

Seekh liya, Ghazal


दे दिया तूने झटका, औकात में रहना सीख लिया।
तूने कानों को मूँदा, मैं दिल से कहना सीख लिया।

बड़ा जोर लगाया फिर भी, तुझसे पार न पाया मैं,
जिस धारे में डाल दिया, बस उसी में बहना सीख लिया।

अपने मिले हालात को, बदल तो नहीं सकता था मैं,
जिस हाल में छोड़ा तूने, उसी को सहना सीख लिया।

पत्थर की सी मजबूती, कभी भी नहीं दिया तूने,
बालू की बनी दीवार सा, पल में ढहना सीख लिया।

कमजोरियां पाले था खुद, मगर विफलताओं को,
मढ़ के किसी और के सिर, देना उलहना सीख लिया।

चुकाने को तो कौड़ी ना थी, उन मोतियों के मोल को,
कंकड़ों को ही मोती बता, बनाना गहना सीख लिया।

हालात से हर समझौता करना, हो गयी नियति अपनी,
पानी के बढ़ जाने पर, दोनों हाथ उबहना सीख लिया।

Wednesday, 30 August 2017

Haiku geet pyar 5


चमकता ना
यूँ चाँद गगन में
तुम न होते

कहाँ से होती
ठंडक पवन में
तुम न होते

आ नहीं पाती
सुगंध सुमन में
तुम न होते

होते न फूल
पुष्पित चमन में
तुम न होते

राहत कौन
दिलाता थकन में
तुम न होते

मिलता नहीं
आशीष नमन में
तुम न होते

बुझाता कौन
पावक तपन में
तुम न होते

जीता ये दिल
काँटों की चुभन में
तुम न होते

भेद न होता
जीवन मरन में
तुम न होते

जीते जी हम
हो जाते कफ़न में
तुम न होते


**************

मन भावन
बहकाये सावन
घेरी बदरी

पड़े फुहार
दिल गावे मल्हार
प्रीत कजरी

घटा ने सखी
दिल किया दीवाना
तू ना हंस री

तुम्हरे संग
बरसेगा सावन
प्रेम रस री

दिल में मेरे 
चकोर सी तुझसे
प्रीत गहरी

कौन सुनेगा
तुम बिन साजन
गीत हमरी

दिल की किये
न जाओ परदेश  
गली संकरी

आएगा लौट  
जाकर परदेश
जाने कब री

बांध रखूंगी
अबकी बरसात 
प्रेम रसरी


************

ख़त

नहीं संभाले
मैंने भी लिखा उसे 
प्यार में ख़त


लिख के फाड़ा    
कई बार तो लिखा  
पहला खत  

फाडे भी जाते
आंसू नहीं बहाते

सारे ही ख़त

फाड़ कर वो 

बहुत पछताई
पहला ख़त


उसका भेजा
प्यार का सिलसिला
चलाया खत

खोल दी पट्टी
दीवार के छिद्र में
खोंसी वो चिट्ठी

पढ़ा जो भाई
गाल पर लगाई
उसका ख़त


धुलते रहे
वह पढ़ती रही
ख़त के शब्द


घिसे वो शब्द
आज भी पढ़ती है
पहला ख़त



दो की जिंदगी
पिरो गया सूत्र में
नन्हा सा ख़त




*********


इन आँखों में
मेरी हर सांसों में
तुम्हीं तुम हो

दिल में तुम
जिंदगी में हमेशा
तुम्हीं तुम हो

हंसीं लगतीं
जिन राहों में साथ
तुम्हीं तुम हो

देख लगता
गगन सितारों में
तुम्हीं तुम हो

जबसे मिले
मेरी हर यादों में
तुम्हीं तुम हो

*********

देखा जबसे 
बसाये हैं सूरत  
आँखों में तेरी 

पढ़ के दिल   
खिला अपना नाम  
आँखों में तेरी 

देखते हम 
जागता  हुआ प्यार 
आँखों में तेरी 

प्यार ही प्यार 
बसाया बेसुमार 
आँखों ने तेरी 

देख न लेते 
मिलता नहीं चैन

आँखों में तेरी

*********

सूना सावन
आये नहीं साजन
मन में आग 


बुझा ना पाया 
विरहन के सावन 
मन की आग


जगा दी और 
सावन की फुहार
मन की आग


सावन भादों 
बरसात की झड़ी 
आँखों में लगी 

सुखा न पायी  
आंसुओं की बारिश   
मन की आग 

***********

जाता है जग  
सब सो रहे होते  
दिल का दर्द  

जागता जब
मुझे भी जगा देता 
दिल का दर्द 

नहीं बहाता 
लहू पर सताता 
दिल का दर्द 

क्यों न उठेगा 
दुखाओगे तुम यूँ 
दिल का दर्द 

हमें देकर 
चले गए वो दूर 

दिल का दर्द  

*******


तुम जो हंसे
हर तरफ झरे
प्यार के मोती

पाकर तेरा
संवर गया दिल
प्यार के मोती

पाकर दिल
हो गया अनमोल
प्यार के मोती

दिए जो तुम
पिरो लिए माला में
प्यार के मोती

बनाये माला
मिल तेरे व मेरे
प्यार के मोती 

********

घेरे बदरा
कसमस जियरा
उनके बिन

लगा सावन
जलाता सा बदन
उनके बिन

आया बसंत
थे कुम्हलाये हम
उनके बिन

जाड़े की ओस
उड़ाती रही होश
उनके बिन

चैन दुस्वार
हुआ जीना भी भार
उनके बिन

***********

हुए जबसे
सोते भीगीं पलकें
तुमसे दूर

होते ही छेड़ा
चंदा हो मगरूर
तुमसे दूर

बिताई रातें
होकर मजबूर
तुमसे दूर

रहा न साथ
मेरी आँखों का नूर
तुमसे दूर

सांसों की गर्मी
जलाई भरपूर
तुमसे दूर 

***********


दहक उठे
जैसे अंगार लाल
तेरे अधर

मेरे अधर
छू लेने को अधीर
तेरे अधर

प्रतीक्षा कर
पा सके कई वर्ष
तेरे अधर

रख अधर
तुम किये दीवाना
अधरों पर

खो गए हम
जाने कहाँ पाकर
तेरे अधर

*********

कटते नहीं
अकेले रह दिन
तुम्हारे बिन

तन्हा हो गए
इस जहां में भरे
तुम्हारे बिन

लगता न जी
वीरानियों में इन
तुम्हारे बिन

मुरझा गए
फूल होकर खिन्न
तुम्हारे बिन

चैन के पल
कोई ले गया छीन
तुम्हारे बिन 

***********

जाओ न सैंया
मझधार में छोड़
हमारी नैया

हम भी रहे
जितने रहे दूर
तुम सनम

पढ़े न तुम
आंसुओं से फसाने
लिखे थे हम

इतने बड़े
कैसे सम्हालें हम
दिए हो गम

जबसे गए
तुम छोड़ के हमें
अंखियां नम

तुम्हारे बिन
रातों का घना तम
होता न कम

********


छेड़ा जो तूने 
गयी दिल में मेरे  
उल्फत जाग 

तुझसे मिल  
अलापता है दिल  
प्रेम का राग 

दूर न भाग 
लगाकर सनम 
दिल में आग 

डंसती रात  
संग तू नहीं होता 
जैसे की नाग 

देखती पंथ 
बैठ मुंडेर जब  
बोलता काग 

***********


नजर पड़ी
तेरी जो मुझ पर
बिजली गिरी

बिजली गिरी
तेरे इश्क की मारी
हाय मैं मरी

हाय मैं मरी
मुहब्बत में तेरी
गई जकड़ी

गई जकड़ी
तेरा हाथ पकड़
संग मैं चली

संग मैं चली
छोड़ दुनिया सारी
अँधेरी गली  

************

मोल ले लिया
आफत बेशुमार
करके प्यार

कलियाँ कम
मिले कांटे हजार
करके प्यार

खोया रहता
हुआ दिल बेजार
करके प्यार

दिल में हुआ
मीठा दर्द सुमार
करके प्यार

हुआ हमसे
ईर्ष्यालु ये संसार
करके प्यार

*************

कैद परिंदा
दिल को कर देता
प्यार का फंदा

अपनी छोड़
अब उसकी चिंता
प्यार का फंदा

फंसा बेचारा
गया काम से बंदा
प्यार का फंदा

कसता गला
अगर ढीला बंधा
प्यार का फंदा

जरा सी शंका
कमजोर हो जाता
प्यार का फंदा

समय ज्यादा
संवरने में जाता
प्यार का फंदा

घोंट के दम
तड़पाता रहन्दा
प्यार दा फंदा

****************

जलाये हम
मिले कुछ रौशनी
उल्फत की लौ

जलाई मैंने
जले लोगों के दिल
उल्फत की लौ

चलने लगीं
जलाते ही आंधियां
उल्फत की लौ

रौशनी तो दी
दिल राख कर दी
उल्फत की लौ

रखी ढक  के
ताकि बुझ न सके
उल्फत की लौ

***************


पहली बार
भूली न बरसात
भीगे थे साथ

जन्नत लगी
क्या हंसीं थी वो रात
भीगे थे साथ

तुम्हारी ही दी
थी वो प्रेम सौगात
भीगे थे साथ

सोये थे कहीं
जाग उठे जज्बात
भीगे थे साथ

दिल की चाह
कहीं खोये न याद
भीगे थे साथ

**************


पहली बार
देखते ही निकला
तुमसे प्यार

करके हम
सुध बुध खो बैठे
तुमसे प्यार

कहकर के
जमाई अधिकार
तुमसे प्यार

अनजाने में
कहके बंध गए
तुमसे प्यार

निभाएं कैसे
वो यूँ ही कह दिया
तुमसे प्यार

*************


कैसे भुलाएं
बदलीं थीं कलियाँ
बीतीं घड़ियाँ

कैसे भुलाएं
मिलते छुप कर
तेरी गलियां

कैसे भुलाएं
मनाये संग हम
रंगरलियां

कैसे भुलाएं
वादा की होगी मेरी
तू दुल्हनियां

कैसे भुलाएं
भीगे थे साथ हम
वो बुंदलियाँ

*****************


सोते जागते
तुम नजर आते
प्यार का जादू

ऐसा असर
जहाँ से बेखबर
प्यार का जादू

मुझमें तुम
तुझमेँ मैं दिखता
प्यार का जादू

चश्मा अलग
दिखता एक रंग
प्यार का जादू

पत्थर दिल
मोम सा पिघलता
प्यार का जादू

तुमसे मिल
खिल उठता दिल
प्यार का जादू

पत्थर दिल
मोम सा पिघलता
प्यार का जादू

जीना चाहता
किसी और के लिए
प्यार का जादू

दिखते आंसू
घाव नहीं दिखता
प्यार का जादू

दिल में बैठा
तुझ सा बड़ा शख्श
प्यार का जादू

तूली न स्याही
मिटती न लिखाई
प्यार का जादू

अपना दिल
धड़कता फॉर यू
प्यार का जादू 

***************

कैसे छुपाते
आँखों में पढ़े लोग
इश्क का चोर

गली में मचा
जोर जोर से शोर
इश्क का चोर

छुप छुपा के
मिला उससे जा के
इश्क का चोर

अब अकेला
रो के सजा काटता
इश्क का चोर

झेला बेचारा
जीवन भर कैद
इश्क का चोर

****************


आया सावन
देख घटायें घेरी
घुमड़ा मन

उड़ते पंछी
देख के उड़ा मन
प्रेम के वन

खोल के पंख
तितलियों के पीछे
उड़ता मन

हुआ दीवाना
लिखने को फसाना
चला है मन

साथ गुजारे
फिर वो बीते क्षण
ढूंढता मन

**************

मन में ठाना
है इश्क फरमाना
फिरता मन

इश्क की गली
ख्वाबों के गुलदस्ते
सजाता मन

देखता हुस्न
होने से बदनाम
डरता मन

भ्रमर भांति
पाने को मकरंद
डोलता मन

बादल बन
फिरता आवारा सा
पागल मन 
************


देर रात को
मेरी नींद चुराने
तुम आ जाना

केश के फूल
सेज पे महकाने
तुम आ जाना

जोहूंगी वाट
कर किसी बहाने
तुम आ जाना

सोने लगूंगी
सपनों को जगाने
तुम आ जाना

बिखरे होंगे
कुंतल सुलझाने
तुम आ जाना

**************

देना तू दिल
तेरे नाम मैं पिया 
कर जाउंगी

तन्हा ना छोड़
हमका जाना पिया
मर जाउंगी

अंगिया दाग
मत लगाना पिया
धर जाउंगी

तू झटके से 
द्वार खोल ना पिया
डर जाउंगी

बिछी है सेज
आ के जुड़ाना पिया
तर जाउंगी
**************

Haiku Sept 2017 / niti

देखना भला
अवसर अगला
दोष न ढूंढो

लक्ष्य की प्राप्ति
न की जाने की राह
महत्वपूर्ण

विधि से ज्यादा
शिष्टता का पालन
जरूरी होता

क्रोध में व्यक्ति
दिखा देता सबको
स्वयं चरित्र

रखोगे खुद
अपने पे भरोसा
औरों को होगा

कर देने से
भाग्य के द्वार बंद
सोचना बंद

पड़ी आदतें
ढाल लेती हैं हमें
अपने जैसा

परिपक्वता
अभ्यास से आती है
प्रयास करो

पाती उससे
किसी के प्रति निष्ठा
सदा प्रशंसा

सबसे बड़ी
सफलता की राह
इच्छा की शक्ति

औरों के प्रति
करी हुई अच्छाई
वापिस आती

भाग्य व कर्म
जब करें संगम
लक्ष्य सुगम

सदुपयोग
संवारने में कल
आज का कर

चरित्रवान
प्रतिष्ठावान से भी
ज्यादा  महान

अकेला नहीं
विचारवान व्यक्ति
जग में कहीं

किये सत्कर्म
कभी न जाते व्यर्थ
बांध लो गांठ

पूंछ हिलाता
पैसे से लाया कुत्ता
प्यार पाकर

लक्ष्य की प्राप्ति
राह की शुरुआत
दृढ विश्वास

किसी को अंधा
प्यार नहीं बनाता
किसी से ईर्ष्या

बड़ी अजीब
ये दुनिया भी देती
भेष से भीख

काली से काली
हर रात के बाद
आती  है भोर 


**********

हारी बुराई
दशहरा द्योतक   
जीती अच्छाई  

भारत होता 
विजयदश्मी पर 
श्रीराममय   

तीर धनुष 
दशहरा पर खेल 
बालक खुश 

नौ दिन होते  
रामलीला में डूबे   
जय माँ दुर्गे  

पति ने कहा
मुझे खाना हलवा 
हुआ बलवा  

बनी समस्या 
मुंबई की बारिश 
रोड पे नैया  

थामी रफ़्तार 
मुंबई की बारिश  
मूसलाधार 

बॉम्बे शहर
समुद्र घूम रहा  
सडकों पर 

निकला चाँद
लगा के सजा नभ
माथे पे बिंदी

जैसे कुतरी
डाल पे गिलहरी
चू गया आम

पूंछ हिलाती
खूंटे से बंधी गाय
मक्खी उड़ाती

निकल पड़े
जमीं में बीज गड़े
वर्षा देखने

ऐसे क्यों बैठी
तितली तुम रूठी ?
डाल पे सूखी

खींचता चीर
आज भी दुर्योधन 
रोको मोहन 

उठाये सिर 
आते ही बरसात 
खर पतवार 

कमा के लाई 
बच्चों में कामवाली 
बांटती थाली



दिलाते याद
पूर्वजों का संस्कार
पितरपख

पंद्रह दिन
शुभ कार्य वर्जित
पितरपख

प्रसन्न काग
जागे उनके भाग
पितरपख

श्रद्धा से श्राद्ध
मृत आत्मा को प्राप्त
पितरपख

स्नान व दान
पूर्वजों का सम्मान
पितरपख 

बांध के साथ
रखता परिवार
वह है प्यार

करने आयी
हिमालय पे आभा 
प्रभा से भेंट

प्रभा ने रखा
हिमालय पे सोना
लूट लो आ के

जाते ही रात
हिमालय की चांदी
शुभ प्रभात 

उम्र हो चली 
चलो कर आते हैं  
तीरथ कहीं 

डाली को छोड़ 
पतझड़ में पत्ते 
सैर को चले 

वृक्ष को पानी 
हरी भरी हो जाती  
पास की घास 

चढ़ाने खड़ीं
जल बीच निर्जल
सूर्य को जल

देने को अर्घ
जल में खड़ी दादी
छठ का पर्व

उमड़ी भीड़
सूर्य को अर्घ देने 
नदी के तीर

ज्ञान किरण
घट भीतर भेजो
सूर्य ! नमन 

खुदा ने खोला 
जहन्नुम का दर
और ये बोला
हाथ खून लगा ले 
सीट पक्की करा ले 

देखता रहा 
खूंटे को मिमियाता 
बिका बकरा 

Saturday, 5 August 2017

Indraprastha / shakuni maama


इंद्रप्रस्थ

इंद्रप्रस्थ, एक अद्भुत नगरी।
अपनों के ही कलह में उजड़ी ।

दुर्योधन की धारणा भ्रष्ट।
हथियाना चाहा इंद्रप्रस्थ।
विनाशकाल, विपरीत बुद्धि।
लेकर मामा की युक्ति।
कुटिल चाल, शकुनि ने चली।
इंद्रप्रस्थ एक अद्भुत नगरी।

हस्तिनापुर का बंजर भाग;
इंद्रप्रस्थ लगा, पांडव के हाथ।
थे सच्चे पांडव कर्मठ, कुशल;
श्रम से बनाये, भव्य महल।
दुर्योधन देखा, नीयत बदली।
इंद्रप्रस्थ एक अद्भुत नगरी।

बने, कर पांडवों पर आक्रमण,
सोचा, महासम्राट जीत रण।
शकुनि ने, यह करने से रोका।
और अनैतिक काम में झोंका।
भांजे! पांडव, तुमसे  भी बली।
इंद्रप्रस्थ एक अद्भुत नगरी।

ध्येय छल का, द्युत क्रीड़ा की।
स्व बंधुओं को अति पीड़ा दी।
खुलेआम द्रौपदी चीर हरा।
नीचता से नीचे, नीच गिरा।
अपमानित, भरी सभा में कली।
इंद्रप्रस्थ एक अद्भुत नगरी।

छल से हरा, दिया वनवास।
लौटे पांडव, वर्ष तेरह बाद।
इंद्रप्रस्थ, छीना दुर्योधन।
उसने किया कुछ ऐसा यतन।
घुसें न पांडव अपनी ही गली।
इंद्रप्रस्थ एक अद्भुत नगरी।

कृष्ण बने, पांडव शांति दूत।
पांच गांव से, पांडव संतुष्ट।
पांच गांव से, टल जाता युद्ध।
संधि ठुकराया, दुर्योधन दुष्ट। 
मामा की ही पुनः सलाह ली।
इंद्रप्रस्थ एक अद्भुत नगरी।

नातों व संबंधों का मान गया।
पिता व गुरु का सम्मान गया।
प्रीत गयी, मूल्यों की नीति गयी।
वापस ना आयी, जो बीत गयी।
कलुषित भावना, मन में फली।
इंद्रप्रस्थ एक अद्भुत नगरी।

दुर्योधन माँगा नारायणी सेना।
रखे, ग्यारह अक्षौहिणी सेना।
पांडव पाये, प्रभु कृष्ण का साथ।
करने, दुष्ट कौरवों से दो हाथ।
बुरी से लड़ेगी, नीति भली।
इंद्रप्रस्थ एक अद्भुत नगरी।

गुरु, पिता की आज्ञा न माना।
दुर्बुद्धि लिए, किया मनमाना।
महत्वाकांक्षा व गलत सलाह,
लायी दुर्योधन को युद्ध की राह।
कौरव विनाश, होनी न टली।
इंद्रप्रस्थ एक अद्भुत नगरी।

धर्म और सत्य से भटकाकर।
शकुनि ने महाभारत रचाकर।  
कौरव पांडव में कराई लड़ाई।
लड़ मरे परस्पर, भाई भाई।
अंत में धर्म विजय की डगरी।  
इंद्रप्रस्थ एक अद्भुत नगरी।

एस० डी० तिवारी 

Thursday, 3 August 2017

Haiku prakriti pyar 4

लौ क्या लगाई
आग लगी दिल में
तेरे प्रेम की

तुमसे मिले
राग के फूल खिले
जी सुगंधित

तुम सुन्दर
तो प्यार का गहरा
मैं समुन्दर

पायी न तट
उठी प्रेम लहर
ढाई कहर

जाकर नदी
सागर को अर्पित
प्यार में डूबी

मिलने चली
रहता कोसों दूर
पिया से नदी

उमंग भरी
सिंधु पिया के घर
चल दी नदी

चूम के होंठ
समा जाती दिल में
सिंधु के नदी

बहती नदी
देख बहा दिल में
प्रेम की नदी

घुमड़े मेघ
सावन में दिल में
उमड़ा प्यार

प्यार जताता
पंखों में चोंच घुसा
पंछी का जोड़ा

देह रगड़
शेर शेरनी मस्त
प्रणय क्रीड़ा

घेरी बदरी
बांध रखूंगी पी को
प्रेम रसरी

बिखरी जुल्फें
चाँद छुपा घटा में
खोये छटा में

लटका केश
बादल बन छाया
चाँद शर्माया

लगाए टकी
कोयल व चकोर
चाँद की ओर

धुंध से छनी
पड़ी तुझ पे धूप
निखरा रूप

समुद्र तट
भिगोये हम पांव
थाम के हाथ

सिंदूरी शाम
बैठ हम देखते
सूर्य डूबते

*************


तुम नहीं थे
कैसे बताऊँ कैसे
मौसम बीते

तुम नहीं थे
चिढ़ाता फूल पर
बैठ भ्रमर

तुम नहीं थे
ना सुगंध कहीं थे
खिले पुष्प में

तुम नहीं थे
विकल कर जाती
कोयल गाती

तुम नहीं थे
मारते ताने तारे
मिल के सारे

तारों में जोश
आज क्यों बैठ गया
चाँद खामोश

भागी है आज
छोड़ के उसे धूप
सूर्य उदास

बनाने वाला
बड़ा हँसता होगा
इन्सां का दिल

अकेले सोये
देख के आषाढ़ में
बादल रोये

अभी भी याद
मुझको है वो रात
भीगे थे साथ

जगाये रखी
अपने साथ वह
सितारों को भी

खोजती रही
अकेले में है प्यारा
कौन सा तारा

तूने बहाया
डूबा मैं घड़ी घडी
प्रेम की नदी

*******


डुबोई मुझे
दिल में उठकर
प्रेम लहर

सर्दी या गर्मी
सजना की बेशर्मी
होती न कम

ऐसा है तेरा
जले सिंधु अपार
गहरा प्यार

तुम्हारा प्यार
और सिंधु अपार
रत्नों की खान

तेरे प्यार की
होते ही हलचल
दिल में तूफां

नाप ले तू ही
सागर सा गहरा
मेरा है प्यार  

लगाया टक
चकोर रात भर
चाँद का मैं भी

भूल जाने दे
बीती हुई बातों को
याद न दिला

तुम्हारे बिन
बहती प्रेम नदी
प्यासी मैं मीन

दिल में नित
खिलते रहे पुष्प
तूने की शुष्क

प्रेम की राह
चलोगे मेरे साथ ?
थाम लो हाथ

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चमकता ना
यूँ चाँद गगन में
तुम न होते

आ नहीं पाती
सुगंध सुमन में
तुम न होते

राहत कौन
दिलाता थकन में
तुम न होते

होते न फूल
पुष्पित चमन में
तुम न होते

कहाँ से होती
ठंडक पवन में
तुम न होते

जीता ये दिल
काँटों की चुभन में
तुम न होते

मिलता नहीं
आशीष नमन में
तुम न होते

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