Saturday, 16 April 2016

Haiku May 2016


हास्य -
सावधि जमा
भुनने को तैयार
मियाद पूरी

शृंगार व प्रेम  -
आज चन्दन
कभी माथे पे होती
रंगीन बिंदी

चूमती जब
होती थी गुदगुदी
मुझे भी हवा

3. करुण रस
हाथ कांपते
झुर्रियों से भागते
मेरे अपने

मेरी छाँव में
सबके सब पले
दूर हो चले

4. रौद्र रस
दवा को नहीं
संवारने में खर्च
बीबी का रूप
5. वीर रस
तीन के तीन
मनसरहंग थे
मैंने ही पाले


6. भयानक रस
ऐंठी हड्डियां
चेहरे पे झुर्रियां
अभी भी जीना !

7. वीभत्स रस
रखा है छुपा
देखने वाला तो हो
झुर्री में दर्द

8. अद्भुत रस
झुर्रियां नहीं
तजुर्बे के पहाड़
चेहरे पर
9. शांत रस
उम्र बिताई
चेहरे की झुर्रियां
यही कमाई

१० वात्सल्य रस
फल न भी दे
छाँव तो देता ही है
बूढ़ा हो पेड़

११ भक्ति
लगा है मन
अब प्रभु में मेरा
उसी की आस

किसे दे जाऊं
रखवाला तो मिले
संभाली यादें

खींची रेखाएं
चेहरे पर लिखी
लम्बी कहानी


एस० डी० तिवारी


हरेक दिन
कुछ नया सिखाता
गुरु हमारा

खुद पे डंडा
लगा भर देने से
हो जाता खुदा

दुखी किसान
मुरझाई फसल
गर्मी की मार

प्यासे डोलते
पशु छटपटाते
गर्मी के मारे

तपती राह
पथिक है व्याकुल
गर्मी की मार

दुबके रहें
जी करता घर में
गर्मी के मारे

बनी है भट्टी
धूप में खड़ी कार
गर्मी की मार

प्यासा लातूर
जल हो गया दूर
गर्मी की मार

रख दी खोल
सरकार की पोल
एक तस्वीर 


लुढ़क गया 
मारता था उसकी  
गली के फेरे 

पत्थर टूटने लगे   
   
कहीं भी दिखे 
भारतीय व्यंजन 
मुंह में पनि 

सहमी ऑंखें 
फिर न होंगी तन्हा
माँ का ढाढस 

मेरी लाडली 
कितनी बहादुर 
अकेले रही 

ये फटी ऑंखें 
देख फटा जा रहा 
मम्मी का दिल 

मेरी गुड़िया 
फिर नहीं छोड़ेंगे  
अकेले घर 

पापा विदेश 
मम्मी की ड्यूटी  
बेटी रही अकेले 

आई मैं बेटी  
फिर नहीं छोडूंगी 
लाडो को ऐसे 

माँ का आँचल 
भूल गयी पाकर 
पिछले गम 

जल का मोल 
प्यासा ही समझता 
बूँद भी मोती

'एक दिन तो 
साथ छोड़ जायेगा'
कहती रेत 
'मुझे पानी की प्यास'
सुन रेत उदास  


पछुआ चली
पहुंची मेरी गली
गरम हवा

कैसी भी धार
बहादुरों की कभी 
न होती हार

यदि हो मन 
सहस व लगन 
बौना गगन 

दृढ निश्चय 
सरल कर देता 
दुष्कर लक्ष्य

नाप के आयी 
सिंधु की गहरायी 
साहस नाव


रखी है खोल
पुत्रों हेतु धरती 
अपनी छाती

अच्छी फसल 
किसान का नियोग 
वर की खोज


धुमिल न हो
मां मही का आँचल
रखना ध्यान

मां वसुंधरा 
संतानों हेतु वक्ष 
देती है खोल

गर्मी में कुत्ता 
बचा पानी ज्यों फेंका 
उसी पे बैठा

सूखा तालाब 
तलहटी में दबी 
मछली भुनी

पुत्र सा पाला 
फसल जीवन का 
मात्र सहारा

चांद उतर 
झील मे निहारता 
मुख सुन्दर

अच्छी फसल 
किसान का नियोग 
वर की खोज

यंत्रों से खेती 
घूम रहे हैं बैल 
होकर सांड

हल्का हो गया
ट्रेकटर के चलते 
हल का काम

छोटा सा हल 
है भूख भगाने का 
अहम हल 

कांधे फावड़ा 
चले चौधरी चाचा 
नरेगा केंद्र 

होते जो वीर 
बढ़ते चले जाते 
लहरें चीर

सूखे की मार 
खेती का बंटाधार 
घटी उपज

सूखे की मार 
कृषक है बेहाल 
तंगी में साल 


ऐसे ही रूठे 
कब तक रहोगे 
आओ न मेघ 

कबसे प्यासी 
धरती है उदासी 
बिन बादल

हालत देख 
तेरे बिन ताप में 
धरा है मेघ 

कोने में खड़ा 
शीतल जल हेतु 
बुलाता घड़ा 

खोल दे प्रभु 
तू अपना फव्वारा  
नहा ले धरा 

विलोक छटा 
मुस्कराती वसुधा 
घुमड़ी घटा 

हरेक जन 
देख के घेरे घन
मुदित मन 

तू ही जीवन 
व्याकुल जन जन 
बरसो घन 

घुमड़े घन 
देख धरा प्रसन्न 
जल की आस 

बहती वायु 
हो के उन्मत्त मन 
नाचती घास 

बदरी छाई 
हम रहे देखते 
हवा उड़ाई 

घेर के आये 
फिर भी तरसाये
कारे बदरा 

लिये उधार
अकड़ता बादल 
लौटा दे जल 

उदंड सूर्य 
सर्दी में छुप जाता  
गर्मी में उग्र 

आँख न दिखा 
आते ही होंगे रवि !
घेर के मेघ 

हो गये बैल  
ट्रैक्टर के चलते 
बेरोजगार 


बिजली कौंधी
कड़कती जोर से 
अँखियाँ चौंधी

कहते मेघ 
बरस रहे हम 
बाहर देख  

छू मत लेना 
दामिनी का दामन
जल जाओगे 

हुई गायब  
सूरज कि अकड़ 
घेरे बादल 

जला के टोर्च 
जल का वितरण 
देखते मेघ 

जला के बत्ती 
निहारते बादल 
मही का रूप  

चाबुक दिखा 
आसमान कहता 
बरसो घटा 

बरखा रानी 
आई और कर दी 
समां सुहानी 

बिजली गिरी
पर तटस्थ रही  
बेख़ौफ़ मही 


भागता रहा 
साँझ तक तिमिर 
पकड़ा गया 

चलती रही
सुबह तक रात
कहीं जा छुपी 

चलता रहा 
शाम तक दिवस 
था वो विवश 

आम के वृक्ष 
लटके भरे रस
स्वर्ण कलश  

खुलती नींद
सर्दियों में रवि की 
बिलम्ब से ही 

कैसा नसीबा 
बना है घरबार 
पानी का पीपा 

होता बसर 
मुसीबत में बना 
पाइप घर 

इन पीपों को   
पढ़ लिख जाएगी 
तू लगाएगी 

तू भी करेगी  
हम जैसी मजूरी 
जो न पढ़ेगी 


की मजदूरी 
बच्चों को पाला पोशा 
थी मज़बूरी 

बनाते हाथ  
बहुमंजिले घर 
झुग्गी में रह 

नभ सा ऊँचा
समुद्र सा गहरा 
है माँ का प्यार 

ठहर जरा 
टांक तेरी हूँ तेरी 
टूटी बटन 

टांक दो जरा 
कमीज की बटन 
देर हो रही 

हार जाएगी 
बिटिया से गरीबी  
आएगा दिन 

क्या अपराध 
किया है हमने माँ 
पीपा आवास 

बहती वायु 
हुई उन्मत्त मन 
नाचती घास 

जला के बत्ती 
निहारते बादल 
कैसी धरती   

नहीं रुकेंगे  
अभाव के चलते 
डग बेटी के  

माँ की दुलारी 
बनेगी एक दिन 
माँ का सहारा 

बनेगी बेटी  
घर की पतवार
पायेगी प्यार 

करोगे प्यार 
बेहतर जिंदगी 
रहेगी यार   

नहीं है देखा  
पशु पर हँसता  
कोई भी पशु  

बड़ों का फर्ज 
प्यार और सुरक्षा 
छोटो का कर्ज 

होता न युद्ध 
कभी जानवरों में  
सम्पदा हेतु 

दिल की बात 
बन्दर भी करता 
बच्चों से प्यार 

कैसे सीखेगा 
जाति धर्म में बंटा
मनुष्य प्यार  

कनेर पर 
टंगी पीली घंटियां 
ध्वनि के बिना 

सूरजमुखी 
सूरज को ताकती
वो भाग जाता 

आम जो कच्चा 
कर दे दांत खट्टा 
बड़े बड़ों का 

कैद हो जाता
और के चक्कर में  
भौरा बेचारा 

देख करके 
दिल खिल उठते 
फूल खिलते

पल पल जी 
कर लेती तितली 
लम्बा जीवन 

बिखरे रंग  
घुल जाती है आत्मा   
प्रकृति संग 

अपनी धरा 
बिखेरती है छवि 
हरा हो भरा 

हर बसंत 
प्रकृति भी मनाती 
उत्सवानन्द 

देख के चाँद 
हिमालय का रूप 
शर्माया खुद 

प्रकृति ने दी 
अनुपम सौगात  
हंसीं प्रभात 

सूर्य भेजता 
किरणों की नमस्ते 
खोवो न सस्ते 

होते ही भोर 
सुन नाचता मन 
पक्षी का शोर 

प्रातः की बेला
बच्चे चले ले बस्ते 
निरहू ठेला 


भेजा सूर्य ने 
रख लेना सम्भाल
सोने के तार 

सिंधु से कढ
चले हैं दिनकर 
नभ की ओर 

प्रातः है सोना 
पड़ जाय कहीं न 
सोने में खोना 

गर्व में डूबा 
प्रातः भर सागर  
सोने का जल

होते ही भोर 
जगाने चला आता
घंटे का शोर 


गुलाबी गाल
दिल श्वेत बेदाग 
लूटती प्यार 

गर्मी की रानी 
पिलाती मीठा पानी
लीची दीवानी 

गुलाबो रानी 
मुंह से लेना हाल
टोए न गाल 

कोई भी जल्दी 
प्रकृति को न होती 
ऋतु में फल 

तर बतर 
पसीने में पियवा  
गर्मी के मारे 

गर्मी की मार 
ऊपर से हो जाती  
बिजली गुल 

पंखे की हवा 
लगती लू के जैसी 
गर्मी के मारे 

भूख से ज्यादा 
लगे जेठ में प्यास 
गर्मी की मार्

पशु बेचारे
डोलते हो बेकल   
गर्मी के मारे 

शीतल पेय 
दिल चाहता और  
गर्मी के मारे 

शीतल जल 
भर कर बोतल 
बिकता खूब 

बोतल में ले 
पी रहे हिंदुस्तानी 
महंगा पानी

waah 

बिखरे रंग  
घुल जाती है आत्मा   
प्रकृति संग 

प्रातः की बेला
बच्चे चले ले बस्ते 
निरहू ठेला 

गर्मी में तर 
करता तरबूज 
खा लो जी भर 

है जिंदगानी 
नारियल का पानी 
गर्मी की काट

रत्नाकर से 
निकले दिनकर 
नहा धोकर 

सज संवर 
निकले दिनकर 
होते ही भोर  

पूरब छाई 
नभ में अरुणाई 
रवि उदित 

सूरज आता 
चन्द्रमा छुप जाता 
नभ में कहां

टूटी थी थोड़ी 
वो देख मुस्कराए  
मेरी छतरी 

सहता छाता 
धूप व बरसात  
देने को छाँव  

हर्षित प्रभा 
आया लेकर सूर्य 
स्वर्णिम आभा 

नभ से झाँका 
खिल उठे जलज 
सूर्य की आभा 

हुआ विहान
खिले भर मुस्कान 
पद्म के होंठ 

किये तड़ाग
कुमुद का श्रृंगार 
शोभा में डूबा 

कर तो दिए 
जोड़ कर दिखाओ  
दिल के टूक

होंगे ना एक  
फिर से हम दोनों 
दिल दो टूक

किसी ने साजा
कोई बनेगा काल 
कछुआ राजा 

हजारों ऑंखें 
टूट कर पड़तीं   
सुन्दर वस्तु 

सूखा दें चाहे    
तोड़ ही लेते दुष्ट  
सुन्दर पुष्प 

ऑंखें निहारें 
जीभ लपलपाए 
दोनों में द्वन्द 

सज़ा सलाद 
देख मुंह में पानी 
लेने को स्वाद

  
जेठ में ज्यादा 
पानी की दरकार
गर्मी की मार 

खोल दो टोंटी 
अपने फव्वारे की 
इंद्र जी अब  

इंद्र देवता 
तर करो धरती 
मेरी विनती 

तपते दिन 
बादल लाये पानी 
मन प्रसन्न 

कोई भी जल्दी 
प्रकृति को न होती 
ऋतु में फल 

गर्मी की मार 
ऊपर से हो जाती  
बिजली गुल 

पंखे की हवा 
लगती लू के जैसी 
गर्मी के मारे 

पशु बेचारे
डोलते हो बेकल   
गर्मी के मारे 

शीतल पेय 
दिल चाहता और  
गर्मी के मार् 

स्वाद का स्वाद 
गरमी से निजाद 
आम का पन्ना 

शीतल जल 
भर कर बोतल 
बिकता खूब 

बोतल भर  
पी रहे हिंदुस्तानी 
महंगा पानी

सूरज आता 
चन्द्रमा छुप जाता 
न जाने कहां

दें जिंदगानी 
नारियल का पानी 
गर्मी में चैन 

जीवों से ज्यादा  
मरी चीजों से प्यार 
मनु स्वभाव

भीगा बदन 
पर भीगा न मन 
गया बदरा   

उमस भरी 
पसीने में भिगोती 
गरमी मरी 

आज सवेरे 
सोया रहा सूरज 
बादल घेरे

दिखा के छटा 
हमसे मुंह मोड़ 
जाओ न घटा 

देखती गंगा  
लिए जल की आस  
नभ में घटा 

************
आये बदरा
उमड़ घुमड़ के  
दिल हरषे

झलक दिखा 
चले गये बदरा 
बिन बरसे 

मन उदास  
हुई न बरसात  
हम तरसे 

तेज बारिश 
निकले ले छतरी 
हम घर से 

बिजली कौंधी 
छुप गये घर में 
फिर डर से 


महानगर
जमीं ना मयस्सर 
हवा में घर

नशे में कीट  
छिड़काव के बाद
कीट नाशक


जाग उठते 
आस पास के लोग 
बूढ़ों की खांसी

रंभाती गाय 
सुबह खूंटे पर  
दूध तैयार

मुस्करा देते 
गुड़हल के फूल
सूर्य को देख

हो न्यूनतम 
वह सबसे बड़ा 
जिसकी चाह 

मरू की भांति 
विरहन की ऑंखें  
पिऊ की प्यासी  

कल सवेरे 
सोया रहा सूरज 
बादल घेरे


करोगे मैला 
नदी भी परोसेगी 
जल विषैला 

सिंधु का प्रेम 
जाकर डूब जाती 
नदी दीवानी 

कम पड़ेंगे 
जलाने में पापों को   
जग के वन 

नयी फसल 
गिरता निरन्तर  
शिक्षा का स्तर

डिग्री पे भारी
संपर्क में यदि हो 
प्रभावशाली 

ले फर्जी डिग्री 
बन सकते मंत्री 
मेरा भारत

पी गए घोल 
स्वार्थ में लज्जा शर्म 
बजा के ढोल  

होने लगी है  
सत्ता की वसीहत 
मेरा भारत 

तीन तलाक 
कहने से वर्षों का 
रिश्ता बेबाक !

घटा दें यदि  
मुझमे से तुझको 
हाथ में शून्य 


वे ही आते हैं  
जिन्हे भूलना चाहें 
अक्सर याद


बेटे विदेश 
अपने ही देश में 
माँ बाप तन्हा

छोड़ेगा तीर 
अषाढ़ में छुप के 
सूरज वीर  


ताल तरसा 
मेघ नहीं बरसा  
मत्स्य बेचैन 

गति बढ़ाओ 
मानसूनी घटाओं 
दिल्ली आ जाओ 

ऊपर घेरी
बरसी ना बदरी 
प्यासी धरती 

हँसता सिंधु 
देख सूखे नयन 
रोतीं नदिया 

पहुंची नदी 
सागर से मिलने  
खाली ही हाथ 

मांग रही है  
मिनरल वाटर 
प्यासी सरिता 

रवि ने छोड़े 
अपने सात घोड़े 
उगलें आग

रोजा रखते 
वे भली समझते 
जल का मोल

मिलता अब 
बोतल बंद पानी
सूखती प्यास

रखें जो जाने -
एकादशी का व्रत 
पानी का क़द्र

बेटे विदेश 
अपने ही देश में 
माँ बाप तन्हा


कोई निर्जल 
कोई पिलाए जल 
जेठ एकाशी 

बेटे विदेश 
अपने ही देश में 
माँ बाप तन्हा

आते ही नीचे 
शुरू मेढ़ों के गीत 
मेघों के बूँद 

एक असत्य 
छुपाने को बोलोगे   
कितने झूठ 

करती रही
इंसानियत घाव  
छोड़ा न साथ 

चलती चढ़ 
इंसानियत सदा   
प्यार व दया  

कर देती है 
आदमीयता छोटी 
नियत खोटी 

मारता नित
इंसान को दौड़ा के  
लोभ का विष 


जल प्रपात 
देख के बढ़ जाती 
आँखों की प्यास 

संगीत भरा 
कल कल झरना 
मुग्ध नयना

गंगा आरती 
दुष्कर्मों से तारती
पावन  मन 

लक्ष्मी करतीं 
गंगा नहा के दिव्य
काशी का तट

बन जाती है 
नाच रही मोरनी 
चित्त चोरनी 

मजे से रहो  
कब्र के इर्द गिर्द  
कीड़े मकोड़ो 

आक के पत्तों
सोयी है जान मेरी   
तुम्हारे नीचे  

देख के मोर 
छाये बादल कारे 
लगाते नारे 

हुई बारिश 
गाने लगा मल्हार 
मेढक बैंड


गिरि पहने 
कुंदन के गहने 
गर्व में डूबा 

रह जाएगी 
जलाओगे दिल तो 
हाथ में राख 

देते जीवन  
मेघ पर्वत सरि
बनो न अरि

नदी विकल 
प्रतीक्षा में आने की 
बर्फ पिघल 

चांदी पहन  
हिमपात के बाद
सजा पहाड़ 

थी जो उड़ती
चप्पल में चिपकी
हुई बारिश

खो गया मन
बूँद बूँद बूँदों में
बरसा घन 

चले काम पे
ले के हाथ छतरी
घेरी बदरी

आई बारिश
अम्बर में बिजली
नीचे बिछली

नीक ना लागे 
बरसात में झूला  
सजना भूला

झुलूंगी झूला 
डाल नीम की डाल
सावन आया 

पेड़ लगाया 
निरहू के पापा ने 
बैठे छाँव में 

आंच तो आती
रोशनी नहीं आती
दिल जलाए 


चाहा था मैंने
बदल दूँ दुनिया
खुद बदला

फिर से पाया
किसी अन्य रूप में
जो कुछ खोया

बहेगी मन
मन से करो कुछ
हर्ष की नदी

छुपाए होता 
जो विनाश भी होता   
नया खजाना  

मैं तो गाता हूँ 
कोई सुने ना सुने 
खगों की भांति

पड़ी अकेली 
नैनों से बरसात 
सावन मास

पढ़ के पाती 
सखि पुरानी बातें 
भूल न पाती

**************
धारे बरसा 
पपीहरा तरसा 
सावन मास

लायी बहार 
रिमझिम फुहार 
सावन मास

महक उठे 
मुहब्बत के फूल 
पिया खिलाये

लेकर आये 
उपहार पिया जी 
मन को भाये

खेलती खुशी 
खेलते जब संग 
बच्चे व बूढे

जब भी पाता 
बूढापा मुस्कराता 
बच्चों का साथ


चहक उठी 
उल्फत की बगिया 
साजन आये

ड़ूबी गलियां 
बारिश में किसी की 
ड़ूबीं अंखियां

कानून अंधा 
चिल्लाते अधिवक्ता 
बधिर भी क्या ?

लुढ़क गयी  
गरीब की थाल से  
महंगी रोटी

जलाया घर 
था खुद का जलाया 
अपना दीया

मौन जो रही 
वह अदालत थी 
चीखा खंजर

चीखे बहुत 
इंसाफ को खंजर 
मौत के बाद

सखी करूँ क्या 
घिर आये बदरा 
पी ना पजरा

कैसे सहेली 
रे अबकी सावन 
भीगूँ अकेली

सुनी पुकार 
बादलों ने मही की 
लाये फुहार

रात मे खेलें 
लुका छुपी का खेल 
चांद व मेघ


शक्ति के साथ 
होने को कामयाब 
जरूरी युक्ति 

बहा ले गयी 
अबकी बरसात 
खाट भी साथ 

यार जो रूठा
मधुशाला में ढूंढा
उसका पता 

देश को दिया 
कैसा ये लोकतंत्र 
लूट का मंत्र 

हो के स्वतंत्र 
पाया सत्ता का तंत्र 
लूट की छूट 

हो गयी लुप्त 
मधुशाला में जा के 
सुध व बुध 


मिले न मन 
वैवाहिक जीवन 
होता दुस्वार

मिला ना मन 
सूना रहा सावन 
दोनों की रार

कुछ हुआ था 
जब वह छुआ था 
पहली बार

पढ़ के पाती 
सखि पुरानी बातें 
भूल न पाती

Friday, 8 April 2016

Heroin


छा गईयां मैं तो सजणा, तेरे दिल दिमाग वे।
किता तूने मेनू हवाले, मैं तेनू आग दे।

मैं तो वाँ 'हीरोइन', बॉलीवुड दी समझना ना।
मैं वां मॉर्फीन दी बेटी, नूर दी समझना ना।
साडे इश्क विच फंस के, नइयों सकदा भाग वे।
छा गईयां मैं तो..
मेनू तू माशूक बनाया, साडा तू फरहाद वे।
मेनू जे गले लगांदा, अस चढ़ जांदी दिमाग वे।
मैं वी तो गांदी रहवांगी, प्यार दी मीठी राग वे।
छा गईयां मैं तो..
व्याह कर लई मेनू तू, तलाक दी सोचियो  ना।
रहना वे नस विच तेरी, दिल कड़ी तू तोडियो ना।
जद करेगा इश्क तू मेनू, करांगी बाग बाग वे।
छा गईयां मैं तो ..
करदा जे वी प्यार मेनू, बन जांदी मैं ओदी जान।
बन्दा जे जलौंदा मेनू , बन धुंआ ले लेंदी जान।
दे दिता वे हाथ तूने, बीचों बिल दे नाग दे ।
छा गईयां मैं तो ...

एस० डी० तिवारी 

Friday, 1 April 2016

Ayush / yoga

आयुष

आयुष को अपनाओ प्यारे।
दुष्कर रोग भगाओ प्यारे।

प्रकृति में है छुपा खजाना।
स्वास्थ्य का, आयुष ने जाना।
होम्यो और योग का मंत्र,
इसने बड़ी भली पहचाना।
स्वस्थ जीवन बिताओ प्यारे।
आयुष को   ...

चुन चुन कर जड़ी बूटी।
लाकर के सुखाकर कूटी।
आयुर्वेद की गुणकारी,
बनाए आसव और वटी।
कष्ट से मुक्ति पाओ प्यारे।

वेद पुराणों का है ज्ञान।
और भरा इसमें संधान।
जन जन को निरोग रखेगा,
और करेगा आयुष्मान।
अपनी आयु बढ़ाओ प्यारे।

एस० डी० तिवारी



योग के बल दुनिया, संवरने लगी है।
थकी जिंदगी अब, सुधरने लगी है।

योग से सकते हम, चेतना को जगा।
योग से सकते हम, वेदना को भगा।
बने हैं अनेक योग के विशेष आसन,  // बने योग के हैं, अनेकों ही आसान
योग से सकते हम,  लगन को लगा।
सही राह अपने, ये चलने लगी है।   जिंदगी रूप सुन्दर धरने लगी है
योग के बल ...

रखने में सक्षम, सुन्दर, स्वस्थ तन-मन।
चलता सुचारु, तन, मन, बुद्धि, जीवन।
अपनाया है जिसने योग साधना को,
अपने पर वो ही कर पाया नियंत्रण।
जिंदगी संतुलित अब रहने लगी है।
योग के बल ...

लिए स्वस्थ भारत का सपना है योग।
तन, मन की सतत साधना है ये योग।
रखने को सबका, स्वतः सुखी जीवन,
रोगों को भगाने का, हांकना है योग।  
नित शक्ति आत्मिक भी बढ़ने लगी है।
योग के बल ...

सदियाँ से भारत, रहा अग्रणी है।
जग को सिखाया, योगों की कड़ी है।
चला आ रहा है, वेदों से चिरंतन,
योग की दुनिया, अब तन के खड़ी है।
जयगान भारत की करने लगी है।
योग के बल ...

एस० डी० तिवारी




योग ने मनुष्य को संवार दिया।
जिंदगी थकी को भी, सुधार दिया।

चेतना जगाने का मन्त्र है योग।
वेदना भगाने का यंत्र है योग।
मन, बुद्धि पर नियंत्रण रखने का,
सबसे सरल, उत्तम, तंत्र है योग।
जीवन की सुंदरता को निखार दिया। 
योग ने  ...

स्वस्थ भारत का, सपना है योग।
तन, मन की सतत साधना है योग।
सबकी रखता निरोग, सुन्दर काया,
सुखों का नियोग, अपना है योग।
आत्मिक शक्ति और सुविचार दिया। 
योग ने  ...

सदियों से भारत, रहा है अग्रणी।
विश्व को सिखाया, योगों की कड़ी।
वेदों से रहा चमत्कार, चिरंतन,
योग की दुनिया अब भी, तन के खड़ी।
जयगान भारत की संसार किया।
योग ने  ...

एस० डी० तिवारी

Monday, 28 March 2016

Haiku techniques

haiku technique 1

 किगो 
हाइकु प्रकृति से सम्बंधित विषयों पर लिखे जाते हैं। किसी ऋतु या मौसम से सम्बंधित होना अच्छा मन जाता है।  किगो ऋतु विशेष को इंगित करने वाले शब्द होते हैं जैसे फूल, टेसू अदि का नाम एते ही बसंत ऋतू का बोध होता है इसी प्रकार पानी, मेढक, बाढ़ अदि शब्द बरसात को इंगित करते हैं और बर्फ, कोहरा, धुंध, आदि सर्दी को दर्शाते हैं 

वाक्यांश और खण्ड :
प्रथम और द्वितीय पंक्ति वाक्यांश होते हैं और तृतीय पंक्ति दूसरा खण्ड 

जीवन यात्रा 
गोलाई में घूमती 
घूमर चक्की  

 पुराणी वीणा 

कबाड़ी की दुकान 

पिता बैकुंठ 



पहला पत्ता 

पतझड़ का गिरा 

उसकी कब्र 



नाचने लगा 
बारिश से पहले 
छत पे मोर 

करते राज्य  
नागफनी या बिच्छू 
मरु की गर्मी 

यहाँ की वहां 
उड़ा के ले जाती लू 
मरु की रेत 

शुरू हवा का 
मरु में गर्मी आते 
रेत से खेल 

बुझती प्यास 
खा के खीरा ककड़ी 
जेठ महीना  


 हाइकू तकनीक २ 

पंक्ति २ और ३ खण्ड और पंक्ति ३ वाक्यांश 

Example 

rabbit-ear iris
it gives me an idea
for a poem

banana leaf—
a gargoyle for my
old hut

corn stubble
the scarecrow looks
scruffy now

envious
a summer lily
in stagnant pond


तकनीक ३ 
Contest 3 - Pivoting

Lines 1 and 2 shall be a phrase  and Line 2 and 3 a phrase both creating images that are juxtaposed.  The middle line acts as a gate that can swing either up or down.  The result should be a middle line that has two meanings depending on whether it is read with the first or last line.  In the beginners haiku class it is stressed that L1 and L2 should be grammatically correct as should L2 and L3 but L1, L2 and L3 are not a complete sentence.   Therefore it reads as either a phrase|fragment or fragment|phrase (see the first two contests).


Example taken from Basho the complete Haiku as translated by Jane Reichhold:

first snowfall
almost finished
on the bridge

Tarzan rope
tied to tree
a warning note

neighbor mows
at shared boundary 
the long-and-short of it



हाइकु टिप १ 
हाइकू तीन पंक्तियों ५-७-५ वर्णों में विभाजित होता है। यानी को पहली व अंतिम पंक्ति में ५-५ वर्ण और दूसरी में ७ वर्ण। 
हाइकु टिप २ 
हाइकू की विषय वस्तु प्रकृति होती है।  जीवन और दैविक विषयों पर भी हाइकू लिखे जाते हैं, जिन्हें शेनर्यू कहते हैं। 
हाइकु टिप ३ 
हाइकु भावात्मक दृष्टि से दो खण्डों में विभाजित होता है। एक साधारण खण्ड या वाक्यांश जिसमे विषय वस्तु के बारे में साधारण या आधारभूत बिम्ब प्रस्तुत किया जाता है तथा दूसरा विशेष खण्ड जिसमे उससे सम्बंधित विशिष्ट बिम्ब प्रस्तुत किया जाता है । 
हाइकु टिप ४ 
हाइकु तीन पंक्तियों का वाक्य, कथन  या वक्तव्य नहीं होना चाहिये। 
हाइकु टिप ५  
हाइकु में पूरा वाक्य नहीं अपितु वाक्यांश लिखे जाते हैं। 
हाइकु टिप ६ 
हाइकु में सम्बन्ध बोधक, समुच्चय बोधक आदि शब्दों का कम से कम करना चाहिए। 
हाइकु टिप  ७    
हाइकु में व्याकरण के चिन्ह विराम, अर्ध विराम आदि प्रयोग नहीं किये जाते। 
हाइकु टिप ८ 
हाइकु में दो बिम्ब, विचार, भाव या दृश्यों को तुलनात्मक रूप से इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है कि वे पृथक होते हुए भी एक दूसरे के पूरक हों या परस्पर सम्बंधित हों। 
हाइकु टिप ९ 
हाइकु में साधारण बात को असाधारण तरीके से कहना ही उसे सुन्दर बनता है। 
हाइकु टिप १० 
कोई अच्छी सूक्ति भी ५-७-५ वर्णों में प्रस्तुत करने से हाइकु नहीं बनती जब तक हाइकु के अन्य गुण न हों । 
हाइकु टिप ११ 
हाइकू के विशिष्ट खण्ड में चौंकाने वाला तत्व होना चाहिए जिसे पढ़कर विस्मय का वोध हो या वह प्रथम खण्ड से सम्बंधित कोई रहस्य उजागर करता हो।
हाइकू टिप १२
हाइकु की दो पक्तियां जुड़ कर एक भाव प्रकट करनी चाहिए और तीसरी पृथक।

हाइकु टिप १३ 
तीन पंक्तियों में होने के बावजूद हाइकु एक वाक्य नहीं प्रतीत होना चाहिये। 


हाइकु टिप १३ 
हाइकु का दूसरा यानी विशिष्ट खण्ड प्रथम खण्ड में मोड़ या घुमाव प्रदान करता है।  
हाइकु टिप १४ 
हाइकु में शब्दों को दोहराने से बचना चाहिए ताकि अपनी वास्तविक बात कहने के लिए अधिक स्थान मिले। 
हाइकु टिप १५ 
हाइकु में यथार्थ या व्यवहारिक बातों का ही चित्रण होता है 
हाइकु टिप १६ 
उपमा या रूपक अलंकार प्रयोग करते समय उपमेय की व्यवहारिकता का ध्यान रखना चाहिए 

हाइकु टिप १७ 
हाइकू में भावात्मक दृष्टि से दो खण्ड होने आवकश्यक हैं 








मैंने हाल ही में आकाश या आकाश में दिखने वाली वस्तुओं से सम्बंधित अंग्रेजी में हाइकु  लिखने की एक प्रतियोगिता आयोजित किया था । इस प्रतियोगिता में २५ प्रतियोगियों की संख्या सिमित कर दी थी क्योंकि हर एक प्रविष्टि को ध्यानपूर्वक पढ़कर उन पर टिप्पणी करनी होती है और प्रथम, द्वीतीय व तृतीय स्थान के लिए प्रिविष्टियां चुननी पड़ती हैं। इसके लिए १३ दिन का समय निर्धरित था मगर एक ही दिन में वांछित प्रविष्टियां आ गयीं।  इनमे कुछ हलके तो कई दुनिया के जाने माने हाइकुकारों के भी हाइकु हैं।  कुछ अन्य बड़े हाइकुकार के भी हाइकू सम्मिलित होते पर प्रविष्टियों की सीमा के कारण ऐसा नहीं हो सका। अब मैं 'हाइकु मञ्जूषा' और 'साहित्यिक मधुशाला' के सदस्यों से आग्रह करता हूँ के वे इनमे से सर्वोत्तम तीन हाइकु चयन करने में मेरी मदद करें। सभी हाइकु का हिंदी रूपांतर करके मैंने क्रमशः प्रत्येक के नीचे लिख दिया है, जो 'हाइकू मञ्जूषा' में उपलब्ध हैं ।यहाँ सदस्यों को कुछ अंतर्राष्ट्रीय हाइकु पढ़ने को मिलेंगे।  

१. अपने चुने तीनों हाइकु इसी मंच पर ही टिपण्णी में लिख दें अथवा अमुक हाइकु के नीचे 'रिप्लाई' में इंगित कर दें। सभी हाइकु  'हाइकु मञ्जूषा' में इसी नोट के नीचे उपलब्ध हैं।
२. यदि इनमें से किसी हाइकु को अपना बनायें, तो आपका हाइकु किस प्रकार का होगा ?

एस० डी० तिवारी

श्रेष्ठ का चुनाव करना कितना कठिन काम है, इसी बात से पता चलता है कोई भी अपना निर्णय नहीं दे सका।  अब यह काम मैंने आसान कर दिया है, सूचि को घटाकर ९ कर दिया है अब इनमे से ३ सर्वश्रेष्ठ हाइकु का चुनाव करना है।

१ 
silvery skies gaze
gelid air swims through warm breaths
quiet vapor soars
                -Njeri
नभ निहार रहा  
सांस पर तैरती ठंढी हवा 
चुपके उड़ती भाप  

२ 
blue kite in the sky
so lost in the blue above
one side catches sun
                   - Julia Ward
नीली पतंग 
नीले नभ में खोयी 
सूरज देख रहा    
३ 
spring rain
to fallen cherry blossoms 
my eyes fall too
                     - Malabu
बसंत की वर्षा 
चेरी पुष्पों पर गिरी 
मेरी ऑंखें भी 
४  
Bright coloured strokes etch
Veiled sun's rain glistened paintbrush:
Nature's fine easel.
             - Lolly.xx
चमकीला उभरा   
बरसात में सूरज का 
रंग भरने का फ्रेम 
५
cuckoo
pours his heart out--
 moonlit night
         - Rajkumar
चकोर चांदनी में 
निकाल  रख देती 
अपना दिल  
६ 
Streaks of southern light 
Bending in the solitude
Of summers gold ray
           - Poet4luv
अकेले  झुकी 
दक्षिण में  ग्रीष्म की 
सुनहरी किरणें 
७ 
dawn breaks pink 
as the moon smiles above
pomegranates star
          -Cuul
भोर की लाली 
देख चाँद मुस्कराता  
अनार तारा 
८ 
Up to the heavens 
fly angels
watching over us
       -Avites
स्वर्ग तक 
उड़ के जाती परियां 
हम पे दृष्टि 
९ 
Patches of blue,
Beneath snowy-white cotton.
Sky and it's wonders.
           -Silvermythe
नीले चकत्ते 
नीचे बर्फ सी श्वेत रुई  
नभ के अचरज


 हाइकु के रूप 

१. एक पंक्ति , दो पंक्ति 
२ सबी सैद्धान्तिक दैविक 
३ वबी 
४ पाइवोट  या धुरी  
५ किगो - मौसम 
६ रूपक अलंकार 
७ अनुप्रास 
८ यमक 
९ 
१० 
११ लीप या छलांग - भाव को अचानक दूसरे भाव में परिवर्तित कर देना 
१२ फोकस फलाना 
होते बेघर 
कटे एक दरख़्त 
अनेकों खग 

टूटा पिंजरा 
हुआ पूरा चमन 
पक्षी का घर 

१३ फोकस को सिकोडना   

नीम की छाँव
दादा की खाट तले
कुत्ते का ठाँव

१४ कठिन परिस्थिति 
१५ रहस्य 
१६ प्रथम और अंतिम पंक्ति मिल कर पूर्णता प्रदान करें 
१७ मजाकिया 
१८ पहेली 
१९ भावनात्मक 
२० क्रिया  का संज्ञा 
२१ जीवन का खाका  
२२ दो अर्थी 
२३ शब्दों के खेल 
२४ साधारण वास्तु का सौंदर्य 
२५ अचम्भा 
२६ शब्द की पुनरावृत्ति या श्लेष 
२७ दो घटनाएं साथ घटित हों 
२८ 





हाइकु कैसे लिखें
हाइकु एक जापानी काव्य विधा है, जिसका प्रचलन १६ वीं शताब्दी में प्रारम्भ हो गया था. एक जापानी कवि बाशो को हाइकु का जनक माना जाता है। हाइकु मात्र सत्रह मात्राओं में लिखी जाने वाली कविता है और अब तक की सबसे सूक्ष्म काव्य है और साथ ही सारगर्भित भी। हाइकु की लोकप्रियता व सारगर्भिता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज दुनिया कि हर भाषा में हाइकु लिखे जा रहे हैं। कुछ हिंदी विद्वान हाइकु काव्य को विदेशी बताकर आलोचना भी करते हैं। पर साहित्य को किसी भाषा, क्षेत्र या तकनीक की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता. बल्कि मैं तो यह कहूँगा की जिस प्रकार मारुति कार, जापानी होकर भी छोटी होने के कारण हमारे यहाँ आम आदमी तक पहुँच बना ली उसी प्रकार हाइकू भी आम आदमी तक बड़ी सरलता से पहुँच सकता है। क्योंकि इसमे आम और साधारण बातों को ही जो प्रकृति और हमारे जीवन से जुडी होती हैं, सुन्दर और विशेष विधि से कम से कम यानी सत्रह अक्षरों में कह दिया जाता है। यह विधि उन कवियों के लिए वरदान है जो अच्छे भाव, ज्ञान व विचार तो रखते हैं पर छंद बंध करने की क्षमता कम होने के कारण अपनी कविता लिख ही नहीं पाते। 
हिंदी हाइकु मात्र १७ वर्णों में लिखे जाते हैं। ऐसा लगता है कि हाइकू लिखना अति सरल है पर लिखने बैठे तो लगता है कितना कठिन भी है. कई बार तो ५ मिनट से भी कम समय में हाइकु बन जाता है और कई बार एक हाइकु लिखने में घंटों लग जाते हैं। इसका कारण है इसकी लिखने कि कला और इसका सारगर्भित होना. एक नन्हा सा हाइकु बहुत बड़ी बात कहने का सामर्थ्य रखता है और साधारण बात को भी ऐसे असाधारण तरीके से कह देता है जिसे पढ़कर पाठक रोमांचित हो जाता है तथा एक पृथक आनंद का अनुभव करता है। 
हाइकु में मात्र १७ अक्षरों में जो तीन पंक्तियों में विभाजित होते हैं, अपने विचार प्रकट करने होते हैं या किसी दृश्य विशेष को दर्शाना होता है और इतने कम अक्षरों में बिम्ब प्रस्तुति के साथ रचना को रुचिकर भी रखना होता है जो एक कठिन कार्य है। क्योंकि इसमे कवि अपनी पूरी बात विस्तृत रूप से नहीं कह पाता। हाइकु लिखना गहरी सोच, अध्ययन व अभ्यास का परिणाम होता है। हाइकु लिखने वाला कोई भी अपने को पूर्ण रूप से पारंगत नहीं कह सकता। 
अपनी कला के कारण हाइकु एक अपूर्ण कविता होते हुए भी पूरा भाव देने में सक्षम होता है।हाइकु ऐसी चतुराई से कहा जाता है कि पाठक अथवा श्रोता अपने ज्ञान व विवेक का प्रयोग करते हुए उसके भाव या उद्देश्य को पूर्ण कर लेता है।  चूकि पाठक हाइकु को पढने के लिए उसमे पूर्ण रूप से घुसना पड़ता है, वह उसे अपने से जुड़ा व आनंदित अनुभव करता है। 
हाइकु लिखने की विधि
अंग्रेजी हाइकु में १७ सिलेबल यानी मात्राएँ या स्वर की इकाई होती हैं परन्तु हिंदी में अभी तक १७ वर्णों में ही हाइकु लिखे जा रहे हैं. वर्णों की गणना करके लिखने में कुछ अक्षर कम अवश्य मिलते हैं पर लिखने में अति सरलता का अनुभव होता है और यदि कम अक्षरों में काम चल जाता है तो अधिक की आवश्यकता ही क्यों.
हाइकु में किन्ही दो भाव, विचार, बिम्ब या परिदृश्य को मात्र १७ वर्णों में तीन पंक्तियों में दो या अधिक वाक्यांशों में इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है ताकि प्रथम व अंतिम पंक्ति में ५-५ वर्ण व दूसरी पंक्ति में ७ वर्ण हों. दोनों भावों, विचारों या दृश्यों को तुलनात्मक रूप से इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है की वे पृथक पृथक होते हुए भी परस्पर सम्बंधित हों। हाइकु की तीन पंक्तियाँ भावात्मक दृष्टि से दो खण्डों में विभाजित होती है. एक साधारण खंड तथा दूसरा विशेष खंड. साधारण खंड में विषय वस्तु की आधारभूत भाव, बिम्ब, दृश्य या विचार रखी जाती है तथा विशेष खंड में उससे सम्बंधित विस्मित करने वाला विशेष तत्व. दोनों खंड पृथक होते हुए भी परस्पर पूरक होते हैं. दोनों खंड व्याकरण की दृष्टि से स्वतंत्र होने चाहिए. अपनी कविता १७ वर्णों में तीन पंक्तियों में लिख देने से हाइकु नहीं बन जाता बल्कि अच्छे हाइकू की विशेषता है उसमे पाठक को चौकाने वाला तत्व. यहाँ यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी की हाइकू में साधारण बात को ही असाधारण तरीके से कही जाती है. हाइकु एक वाक्य का नहीं होता। हाइकु में लय, विराम, पूर्ण विराम आदि चिन्हों की आवश्यकता नहीं होती. हाइकू मूलतः प्रकृति विषयों पर लिखे जाते हैं पर आजकल जीवन संबधी विषयों पर भी हाइकू बढ़ चढ़ कर लिखे जा रहे हैं. जीवन व ईश्वरीय विषयों पर लिखे हाइकु को अंग्रेजी में सेनर्यू कहा जाता है. वैसे हाइकू और सेनर्यू में विषय के अतिरिक्त और कोई अंतर नहीं है.
तीन पंक्तियों में से दो विषय वस्तु एवं उसके आधारभूत भाव या व्यवहार को दर्शाता है तथा तीसरी विशेष पंक्ति जिसमे उससे सम्बंधित विस्मयकारी भाव होता है. उदहारण के लिए मेरे निम्न हाइकू को पढ़ें -
दाना लेकर
चुहिया हाथ जोड़े
बिल्ली घात में
उपरोक्त हाइकु में 'दाना लेकर चुहिया हाथ जोड़े ' एक बिम्ब प्रस्तुत कर रही है यानी चुहिया हाथों में दाना लेकर खा रही है किन्तु उससे पृथक यहाँ पर एक और बिम्ब है 'बिल्ली घात में' यानी की बिल्ली भी भोजन की जुगत में है और वह भोजन के रूप में चुहिया को देख रही है. दूसरा बिम्ब पहले पर निर्भर है अगर वहां चुहिया नहीं होती तो बिल्ली भी घात में ना होती.
बाशो का एक हाइकू है
old pond
a frog leaps in
sound of water
यहाँ दो दृश्य हैं एक पुराना ताल जिसमे मेढक कूदा, दूसरा पानी कि ध्वनि जिससे ज्ञात हुआ कि मेढक कूदा। यहाँ पुराने तालाब में मेढक का कूदना एक  बिम्ब है और जल की ध्वनि दूसरी। जल की ध्वनि मेढक के कूदने के कारण उत्पन्न हुई है। पहली दो पंक्तियां एक साधारण बात कह रही हैं कि पुराने तालाब में मेढक कूदा और तीसरी पंक्ति में एक घुमाव आ जाता है 'जल में ध्वनि' जो मेढक के कूदने का परिणाम है और एक विस्मय का बोध कराती है। बीच कि बात यानी कि मेढक जल में ही कूदा पाठक 'ध्वनि ' से समझ लेता है। 
इसका हिंदी रूपांतर मैंने इस प्रकार किया है -
पुराना ताल
कूद गया मेढक
जल में ध्वनि 

हाइकू के तीन मूल तत्व
१. ५-७-५ वर्णों के क्रम में व्यवस्थित तीन पंक्तियों कि कविता
२. दो भाव, विचार, बिम्ब, दृश्य आदि कि तुलनात्मक प्रस्तुति
३. विस्मयकारी बोध अथवा चौंकाने वाला तत्त्व
हाइकू लिखने के क्रम
१. भाव या विचारों की सोच व आत्म-मंथन
२. उचित शब्दों का चुनाव
 ३. उन शब्दों को ५-७-५ वर्णों के क्रम में हाइकू की तकनीक के अनुसार व्यवस्थित करना
हाइकू लिखने की और बारीकियां आगे के लेख व टिप के द्वारा दी जाती रहेंगी

- एस० डी० तिवारी