Wednesday, 19 June 2019

Europe dekha

मैंने यूरोप देखा
रफाल, बोफोर्स तोप देखा। 
ट्राली खींचती रोप देखा। 
मैंने यूरोप देखा।। 
  
 
भवन आलीशान देखा। 
मकान एक समान देखा।।
बर्फ से ढके पहाड़ देखा
ठंड, कंपाती हाड़ देखा।।
हरे भरे खेत देखा। 
धूल ना रेत देखा।।
प्रकृति का उपहार देखा। 
धरती का शृंगार देखा।।
वादियों में हरियाली देखा। 
घूँघट न बुर्के वाली देखा।।
बेल्जियम का ब्रूज देखा। 
कैनाल में क्रूज देखा।।
म्यूनिख एम्सटर्डम देखा।  
पेरिस और रोम देखा। 
बिन चरवाहे चरती गैया देखा। 
नहर में चलती नैया देखा।।
जगह जगह नहर देखा।
नहरों का ही शहर देखा।।
स्वच्छता और सफाई देखा। 
दूध बिना मलाई देखा।।
बोतलों में अंगूर के ठोप देखा। 
यूरोप देखा।।

नगर साफ सुथरा देखा
आते जाते बदरा देखा।।
शाम बार पर जुटते देखा
गिलास मग पर टूटते देखा।।
लोगों को करते चीयर देखा,
पानी से सस्ती बीयर देखा।।
बीयर से मंहगी चाय देखा
स्वदेशी को करते हाय देखा।।
भोजन का विचित्र राग देखा। 
खाते हॉट डॉग देखा।।
आटा का डब्बा खाली देखा
घरों में ना कामवाली देखा।।
भारतीय व्यंजन में लिप्त देखा।
दाल रोटी खा तृप्त देखा।।
गोरे गोरियों को पीते देखा। 
पीकर ही जीते देखा।।
देशियों को नेपते देखा। 
पीने मे झेंपते देखा।।
सड़क पे सिगरेट के टुकड़े देखा
गोरों को गाते दुखड़े देखा।।
आत्मीयता का लोप देखा। 
यूरोप देखा।।

नेताओं का न भाव देखा
अधिकारियों का न ताव देखा।।
शासन देखा, अनुशासन देखा
चुस्ती भरा प्रशासन देखा।।
पटरी पर ना कब्जा देखा
बाहर निकला ना छज्जा देखा।।
सड़कों पर सन्नाटा देखा
भीड़ का न ज्वार भाटा देखा।।
भवनों की भव्यता देखा 
पाश्चात्य सभ्यता देखा।।
साइकिल का अलग ट्रैक देखा
पैदल वालों के लिए ब्रेक देखा।।
उलटे हाथ की ड्राइव देखा। 
माइकल की नौवीं वाइफ देखा।।
तम्बाकू न पान देखा। 
थूकते ना इन्सान देखा।।
डेढ़ सौ की स्पीड देखा।
टैक्सी में मरसीडीज देखा।।
शौचालय बिना पानी देखा।
भारतीयों की परेशानी देखा।। 
सुन्दर सजीले चर्च देखा। 
पी पर यूरो का खर्च देखा।।  .
जबरदस्त महगाई देखा
पुलिस की ढिठाई देखा।।
शीशी में सोप देखा
यूरोप देखा।। 

हल्का काम का बोझ देखा 
जीवन के प्रति सोच देखा। 
खामोश गाड़ी के हार्न देखा,
थियेटर में पार्न देखा।।
आस्ट्रिया, बेल्जियम देखा। 
भांति भांति के म्यूजियम देखा।।
नेदरलैंड, इटली देखा। 
स्विट्ज़रलैंड की तितली देखा।। 
फ्रांस का फैशन देखा। 
बुजर्गों में न टेंशन देखा।।  
सुन्दर बने चर्च देखा। 
भारी भरकम खर्च देखा।।
हवा को बनाते बिजली देखा। 
रंग बिरंगी तितली देखा।।
सड़क बाड़़ के अन्दर देखा। 
कहीं न उछलते बन्दर देखा।।
ट्रेन देखा, ट्राम देखा। 
चुम्बन सरेआम देखा।।
चिपके गोपी गोप देखा।
मैंने यूरोप देखा।।

लम्बी गोरी मेम देखा। 
मर्द सेम टू सेम देखा।।
वहां भी कौवा काला देखा
कार्ड से खुलता ताला देखा।।
सत्रह घंटे का दिन देखा। 
जीवन थोड़ा भिन्न देखा।।
तनहा जीता व्यक्ति देखा। 
कैसिनो में बिताते  वक्त देखा।।
सम्बन्धों में खाईं देखा
भाई से दूर भाई देखा।।
रात देखा, भोर देखा
मगर नहीं चितचोर देखा।।
धूप सेंकते नदी का कूल देखा
सबको पालन करते रूल देखा।।
कमाल करते लुटेरा देखा
जालसाजों का डेरा देखा।।
हिटलर का गैस चैम्बर देखा
निर्दयता का अम्बर देखा।।
कार पर चलती साइकिल देखा
चर्च मे रखी बाइबल देखा।।
प्रेम में डूबा पोप देखा
यूरोप देखा।।


पिसा, एफिल टॉवर देखा। 
रोम का ट्रेवी शॉवर देखा।। . 
नेपोलियन का होम देखा।  
ऐल्प्स पर्वत का डोम देखा।। 
पेरिस का फैशन देखा।  
वेनिस और मिलन देखा।। 
मोनालिसा की तस्वीर देखा।।
लौरे म्यूजियम का प्राचीर देखा।।  
जुरिक का लेक देखा। 
बनते हुए चॉकलेट देखा।।  
जंगफराऊ यूरोप की छत देखा।
हर ओर बर्फ ही बर्फ देखा।।
बर्फ में चलती ट्रैन देखा। 
ट्रेवी फाउंटेन देखा।। 
राइन का फॉल देखा। 
वर्सेल्स का हॉल देखा।। 
कोलोसियम सा अजूबा देखा। 
गोरों का मंसूबा देखा।।  
सइने नदी क्रूज देखा। 
लव लॉक ब्रिज देखा।। 
स्नोफॉल का कोप देखा। 
यूरोप देखा 

एस. डी. तिवारी



कुछ क्षणिकाएं

समागम में -
दूर दूर से आये लोग मिले,
एक परिवार सा लगा।
चले जाने के बाद,
सूखे के मौसम में
पड़ी बौछार सा लगा।

  ****

नए लोगों से 
मिलने का चाव था 
अच्छा बर्ताव था 
मुलाकात सौगात 
अपनों का साथ था
फोटो खींचने में भी पक्षपात था।

*****   

हर आगंतुक अपनी रोता है,
समागम कुछ ऐसा ही होता है।

हाथ मिलाये, अजनवी से भी मिले
हाथ हिलाये, घर को चले।

 ****

समागम में -
प्रयोजन से अधिक
व्यवस्था की चिंता होती है
फिर भी सेकता तो
आयोजक ही रोटी है।

एस. डी. तिवारी




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